Modi Cabinet Reshuffle: कंगाल होते पाकिस्तान की हेकड़ी ढीली करने के बाद, अब दिल्ली के सियासी गलियारों में एक बहुत बड़ा ज्वालामुखी फटने को तैयार है। बीजेपी के संगठन से लेकर मोदी सरकार के भीतर मचे हालिया घटनाक्रमों ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बहुत बड़ा और निर्णायक फेरबदल होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विभागों के कामकाज की एक्सरे रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसके बाद अब कई बड़े सूरमाओं की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है।
बर्फबारी देखने वालों के लिए नई गाइडलाइन, बेंगलुरु के 8 पर्यटकों की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट
बिट्टू और कुरियन का पत्ता साफ, ‘पंजाब मिशन’ की तैयारी?
बीजेपी ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए जैसे ही अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, वैसे ही सियासी पंडितों के होश उड़ गए। इस लिस्ट से मोदी सरकार के दो बड़े चेहरों—केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का नाम पूरी तरह गायब है। राजस्थान से राज्यसभा सांसद रवनीत बिट्टू और मध्य प्रदेश से सांसद जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो रहा है।
इस फैसले के पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या है, वो हम आपको आगे बताएंगे… लेकिन उससे पहले हम आपको ये बताते हैं कि आखिर इन दोनों मंत्रियों को राज्यसभा का टिकट क्यों नहीं दिया गया? दरअसल, इसके पीछे बीजेपी की एक बहुत बड़ी चुनावी रणनीति छिपी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा से मुक्त करके सीधे पंजाब के सियासी रण में उतारा जाएगा, ताकि वहां पार्टी को मजबूत किया जा सके। लेकिन नियम के मुताबिक, 21 जून को संसद सदस्यता खत्म होने के बाद इन दोनों मंत्रियों के बने रहने पर सस्पेंस गहरा गया है।
यूपी-दिल्ली में नए सेनापति, कैबिनेट से कटेगा पत्ता?
मोदी सरकार ने सिर्फ राज्यसभा के टिकट ही नहीं काटे, बल्कि संगठन के स्तर पर भी दोधारी तलवार चला दी है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को सीधे उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की कमान सौंप दी गई है।
अब कड़क सवाल यह उठता है कि जब इन दोनों दिग्गज मंत्रियों को संगठन की इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई है, तो क्या कैबिनेट विस्तार में इनसे मंत्री पद छीन लिया जाएगा? ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत इन दोनों नेताओं की विदाई लगभग तय मानी जा रही है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा उपचुनाव और अगले साल होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी कोई भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
PMO की परफॉर्मेंस रिपोर्ट
इस महा-फेरबदल के पीछे सिर्फ चुनावी गणित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का वो हंटर है जो परफॉर्म न करने वाले मंत्रियों पर चलने वाला है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाकर सभी विभागों के कामों की गहन समीक्षा की थी। सूत्रों के मुताबिक, हर विभाग को बकायदा ‘रेटिंग्स’ दी गई है। जिन मंत्रियों का काम उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा, उनका पत्ता कटना अब 100% तय है। यह फेरबदल प्रशासनिक कसावट लाने और 2026-27 के चुनावी राज्यों में क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में मौसम का प्रहार: देवास में बही कार, झाबुआ में झमाझम बारिश; जानिए कब आएगा मानसून










