रीवा के मोहन लाल द्विवेदी, 50 साल से बिना नींद के, डॉक्टरों के लिए अनसुलझी पहेली

 रीवा कहते हैं, बिना नींद के जिंदगी संभव नहीं. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नींद सबसे जरूरी मानी जाती है. लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा में एक शख्स ऐसा भी है, जिसने पिछले 50 सालों से नींद नहीं ली, फिर भी वह पूरी तरह स्वस्थ है. इस अनोखे मामले ने डॉक्टरों को भी हैरानी में डाल दिया है. रीवा के रहने वाले रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी की उम्र करीब 75 साल है. मोहन लाल बताते हैं कि उन्होंने आखिरी बार इमरजेंसी के दौर में चैन की नींद ली थी, उसके बाद से आज तक उन्हें नींद नसीब

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Published On :

जनवरी 26, 2026

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 रीवा

कहते हैं, बिना नींद के जिंदगी संभव नहीं. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नींद सबसे जरूरी मानी जाती है. लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा में एक शख्स ऐसा भी है, जिसने पिछले 50 सालों से नींद नहीं ली, फिर भी वह पूरी तरह स्वस्थ है. इस अनोखे मामले ने डॉक्टरों को भी हैरानी में डाल दिया है.

रीवा के रहने वाले रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी की उम्र करीब 75 साल है. मोहन लाल बताते हैं कि उन्होंने आखिरी बार इमरजेंसी के दौर में चैन की नींद ली थी, उसके बाद से आज तक उन्हें नींद नसीब नहीं हुई. हालात ऐसे हैं कि पलकें तो बंद होती हैं, लेकिन आंखों में नींद नहीं आती. न झपकी, न गहरी नींद… पिछले 50 सालों से उनकी आंखों से नींद जैसे गायब हो चुकी है.

हैरत की बात ये है कि नींद न लेने के बावजूद मोहन लाल पूरी तरह स्वस्थ हैं. न थकान, न कमजोरी, न मांसपेशियों में दर्द. वह एक ही मुद्रा में घंटों बैठ सकते हैं और लंबे समय तक लगातार काम कर सकते हैं. मोहन लाल द्विवेदी ने बताया, ''मुझे नींद आती ही नहीं है. रात को लेट तो जाता हूं, लेकिन नींद नहीं आती. किताबें पढ़ता हूं, टहलता रहता हूं. अब तो यही दिनचर्या बन गई है.''

नौकरी के दिनों में उनकी कार्यशैली भी चर्चा का विषय रहती थी. उनके अधीनस्थ कर्मचारी उनके साथ काम करने से घबराते थे, क्योंकि मोहन लाल लगातार कई-कई घंटों तक बिना रुके काम करते थे. बाणसागर बांध परियोजना के दौरान वह कई किलोमीटर पैदल चलते थे, लेकिन उन्हें थकान महसूस नहीं होती थी.

नींद न आने की इस समस्या को लेकर उन्होंने मुंबई और दिल्ली के बड़े-बड़े डॉक्टरों से भी सलाह ली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. योग, प्राणायाम से लेकर झाड़-फूंक तक सब कुछ आज़माया, मगर नींद फिर भी नहीं आई. मोहन लाल द्विवेदी बताते हैं, ''शुरुआत में परेशान था, लेकिन अब आदत हो गई है. शरीर साथ दे रहा है, यही बड़ी बात है.''

50 साल बिना नींद के जिंदगी… विज्ञान के लिए भी ये एक रहस्य है. मोहन लाल द्विवेदी का यह अनोखा मामला आज भी डॉक्टरों के लिए एक सवाल बना हुआ है.

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