MP News: मध्य प्रदेश के रायसेन से दिल दहला देने वाली एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। रायसेन-भोपाल नेशनल हाईवे पर शुक्रवार सुबह रफ्तार के कहर ने एक हंसते-खेलते मासूम समेत पांच लोगों की जिंदगी पल भर में लील ली। सेहतगंज फैक्ट्री के पास एक पेट्रोल पंप के नजदीक दो तेज रफ्तार यात्री बसें आपस में इस कदर टकराईं कि पूरा हाईवे चीख-पुकार और खून से लाल हो गया। इस भीषण एक्सीडेंट में 5 मुसाफिरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 35 से ज्यादा यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत इतनी नाजुक है कि मौत का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
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ओवरटेक के चक्कर में आमने-सामने की टक्कर
यह खूनी हादसा उस वक्त हुआ जब सागर से भोपाल की तरफ जा रही ‘शक्ति ट्रैवल्स’ और भोपाल से सागर की ओर लौट रही ‘कल्पना ट्रैवल्स’ की बसें आमने-सामने आ गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, दोनों ही बसों की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा थी।
इस भयंकर एक्सीडेंट के पीछे की असली लापरवाही क्या है, वो हम आपको आगे बताएंगे… लेकिन उससे पहले हम आपको ये बताते हैं कि आखिर ये टक्कर इतनी जानलेवा कैसे हो गई? दरअसल, रायसेन से गैरतगंज के बीच का यह पूरा रास्ता सिंगल लेन है। हैवी ट्रैफिक के बावजूद दोनों चालकों ने एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में बसों को ओवरटेक करने की कोशिश की। रफ्तार इतनी तेज थी कि मोड़ पर चालकों का नियंत्रण पूरी तरह से बिगड़ गया और दोनों बसें सीधे एक-दूसरे में जा घुसीं। टक्कर इतनी भयानक थी कि दोनों बसों के केबिन पूरी तरह पिचक गए और खिड़की के पास बैठे यात्रियों के चीथड़े उड़ गए।
कांच तोड़कर निकाले गए शव
धमाके की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण और पेट्रोल पंप के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना हाईवे की तरफ दौड़े। बसों के दरवाजे बुरी तरह लॉक हो चुके थे, जिसके बाद लोहे की रॉड से खिड़कियों के शीशे तोड़-तोड़कर लहूलुहान यात्रियों और शवों को बाहर निकाला गया।
घटना की सूचना मिलते ही गैरतगंज थाना पुलिस, डायल-100 और 108 एंबुलेंस की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा और पुलिस एसपी आशुतोष गुप्ता ने खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। सभी घायलों को तुरंत गैरतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से 12 सबसे गंभीर मरीजों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया है। हादसे के बाद नेशनल हाईवे पर करीब डेढ़ घंटे तक लंबा जाम लगा रहा, जिसे क्रेन की मदद से बसों को हटाकर साफ कराया गया।
एक साल में 17 मौतें, कब जागेगा प्रशासन?
इस हादसे ने एक बार फिर नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) और प्रशासन की बदहाली की पोल खोलकर रख दी है। एनएच-146 का रायसेन से गैरतगंज तक का 40 किलोमीटर का हिस्सा आज भी सिंगल लेन है, जहां चौबीसों घंटे सैकड़ों भारी ट्रक और बसें मौत बनकर दौड़ती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले महज एक साल के भीतर इस डेंजर जोन में 17 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। फोरलेन और डिवाइडर की मांग सालों से अधर में लटकी हुई है।
प्रशासन ने फिलहाल मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है। वहीं, एसपी ने दोनों बस ड्राइवरों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा ठोक दिया है। परिवहन विभाग ने भी अब जाकर स्पीड गवर्नर की जांच के कागजी आदेश जारी किए हैं। लेकिन सवाल वही है कि मासूमों की बलि चढ़ने के बाद ही प्रशासन की नींद क्यों खुलती है?
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