NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक पर चर्चा को तैयार सरकार, कांग्रेस बोली- धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा

NEET पेपर लीक मामले पर सरकार ने चर्चा के लिए तैयार होने का संकेत दिया है, जबकि कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक गलियारों में बहस गर्म है। आखिर सरकार का रुख क्या है और विपक्ष की अगली रणनीति क्या होगी, जानिए पूरी रिपोर्ट।

NEET Paper Leak

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 22, 2026

NEET Paper Leak: संसद के मानसून सत्र के दौरान लंबे गतिरोध के बाद केंद्र सरकार ने लोकसभा में NEET पेपर लीक से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी सहमति जता दी है। सत्र के पहले दिन से ही विपक्ष इस विषय पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा था। विपक्षी दलों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों पर संसद में गंभीर बहस होनी चाहिए। लगातार प्रदर्शन और हंगामे के बीच अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।

सरकार ने रचनात्मक बहस की जताई इच्छा

लोकसभा में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पहले दिन से ही इस मुद्दे पर चर्चा के पक्ष में रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर चर्चा संसद के निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही होनी चाहिए। रिजिजू के अनुसार, चर्चा कब होगी, कितनी अवधि तक चलेगी और किस नियम के तहत आयोजित की जाएगी, इसका निर्णय सभी दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि देश के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सार्थक और रचनात्मक चर्चा हो।

विपक्ष पहले दिन से कर रहा था मांग

मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दल नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा की मांग करते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि छात्रों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर संसद में उठाया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया और सरकार से तत्काल बहस शुरू कराने की अपील की। विपक्ष का आरोप है कि सरकार शुरुआत में इस मुद्दे पर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखा रही थी।

कांग्रेस ने रखी नई शर्त

सरकार की ओर से चर्चा के लिए सहमति मिलने के बाद भी कांग्रेस ने अपनी मांग दोहराई। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी का स्पष्ट रुख है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले अपने पद से इस्तीफा दें, उसके बाद ही चर्चा आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी पिछले तीन दिनों से इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से बहस की मांग कर रही है, लेकिन उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया। कांग्रेस का कहना है कि जवाबदेही तय किए बिना केवल चर्चा पर्याप्त नहीं होगी।

चर्चा के नियमों पर भी उठाए सवाल

के.सी. वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि सरकार ने चर्चा के लिए सहमति तो दी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बहस किस संसदीय नियम के तहत कराई जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है तो व्यवस्थित और विस्तृत चर्चा कराने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि संसद में नियमों के अनुरूप खुली बहस से ही छात्रों और देश को स्पष्ट संदेश मिलेगा।

तीन प्रमुख मांगों पर अड़ा विपक्ष

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अपनी तीन प्रमुख मांगों को दोहराया है। विपक्ष चाहता है कि नीट पेपर लीक मामले पर व्यापक चर्चा हो, शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय की जाए और छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में दर्ज प्राथमिकी (FIR) पर भी पुनर्विचार किया जाए। विपक्ष का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों के समर्थन में संघर्ष जारी रखने का दावा

के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष छात्रों के हितों के लिए अपनी आवाज उठाता रहेगा। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हैं, तो उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि वह छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी।

संसद में बहस पर टिकी देश की नजर

अब जबकि सरकार ने लोकसभा में नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए सहमति जता दी है, सभी की नजर इस बात पर है कि बहस कब और किस प्रारूप में होगी। संसद में होने वाली चर्चा से परीक्षा प्रणाली, छात्रों की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों पर राजनीतिक दलों के विचार सामने आने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मानसून सत्र की सबसे प्रमुख चर्चाओं में शामिल रहने की संभावना है।