छात्रों के लिए नया नियम: अब 8वीं-12वीं के रिजल्ट में होगी पूरे साल के प्रदर्शन की गणना

चंडीगढ़. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एजुकेशन सिस्टम में कुछ बदलाव किए हैं। मिली जानकारी के अनुसार सैशन 2026-27 के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के फाइनल रिजल्ट में साल भर होने वाली सभी परीक्षाओं के अंक जोड़े जाएंगे। जी हां, बोर्ड ने राज्य के सभी स्कूलों को उक्त आदेश जारी कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार साल 2026-27 के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा का अंतिम निर्णय अब बाइमंथली एग्जाम, टर्म एग्जाम, प्री-बोर्ड एग्जाम के नंबरों के साथ होगा। इसके लिए छात्रों को सालभर अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना होगा ताकि साल के अंत में फाइनल रिजल्ट उनका

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Published On :

जून 7, 2026

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चंडीगढ़.

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एजुकेशन सिस्टम में कुछ बदलाव किए हैं। मिली जानकारी के अनुसार सैशन 2026-27 के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के फाइनल रिजल्ट में साल भर होने वाली सभी परीक्षाओं के अंक जोड़े जाएंगे। जी हां, बोर्ड ने राज्य के सभी स्कूलों को उक्त आदेश जारी कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार साल 2026-27 के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा का अंतिम निर्णय अब बाइमंथली एग्जाम, टर्म एग्जाम, प्री-बोर्ड एग्जाम के नंबरों के साथ होगा। इसके लिए छात्रों को सालभर अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना होगा ताकि साल के अंत में फाइनल रिजल्ट उनका अच्छा आए। बता दें कि उक्त आदेश बोर्ड ने सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी, सहायता प्राप्त एफिलिएटिड और एसोसिएटिड मान्यता प्राप्त स्कूलों को जारी किए हैं।

गौरतलब है कि पहले भी बोर्ड ने उक्त आदेश जारी किए थे लेकिन प्राइवेट स्कूल अपनी मर्जी से प्री-बोर्ड एग्जाम आदि के नंबर लगा देते थे। बता दें कि अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि बोर्ड ने साफ आदेश जारी किए हैं कि समय-समय पर सभी बच्चों के प्रत्येक परीक्षा के अंक साइट पर अपलोड किए जाएंगे। इतना ही नहीं इन सभी अंकों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा ताकि कल को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इतना ही नहीं सभी स्कूलों को रिजल्ट आने के बाद कम से कम 3 साल तक सारा डाटा संभाल कर रखना होगा। बोर्ड की फ्लाइंग टीम या कोई भी टीम किसी भी समय स्कूलों में पहुंचकर उक्त डाटा चैक कर सकती है।

बोर्ड द्वारा उक्त कदम इसीलिए उठाया गया है ताकि बच्चे सालभर पढ़ाई पर ध्यान दें और साल के अंत में फाइनल एग्जाम दौरान रट्टा मारकर पास होने की कोशिश न करें। इसके अलावा इस प्रक्रिया से ड्रॉपआउट में भी कमी देखने को मिलेगी। साथ ही जो स्कूल अपने चहेते छात्रों को अपनी मर्जी से नंबर दे देते हैं इस पर भी रोक लगेगी और हर छात्र अपनी मेहनत के हिसाब से अंक हासिल करेगा जिससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और होनहार छात्रों का हौंसला भी बढ़ेगा।

 

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