Union Budget 2026: संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार का मुख्य ध्यान बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास पर है। वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि बजट में की गई घोषणाएं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए संजीवनी साबित होंगी। एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाली रियायतें और समर्थन न केवल उत्पादन क्षमता को बढ़ाएंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के आधार को भी मजबूती प्रदान करेंगे।
युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर
युवाओं के भविष्य पर चर्चा करते हुए सीतारमण ने कहा कि बजट में ‘स्किल डेवलपमेंट’ (कौशल विकास) को लेकर की गई घोषणाएं क्रांतिकारी साबित होने वाली हैं। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक बाजार की जरूरतों के हिसाब से कुशल बनाना है। इसके साथ ही, उन्होंने मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की सरकारी योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस बार मेडिकल टूरिज्म में ‘आयुष’ (AYUSH) को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जिससे पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
राज्यों को बिना ब्याज का ऋण: विकास में बड़ी हिस्सेदारी
राज्यों के साथ समन्वय पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बजट पूर्व बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों ने जो सिफारिशें की थीं, उन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया है। सरकार राज्यों को ‘कैपिटल एक्सपेंडिचर सपोर्ट’ के रूप में 50 साल के लिए बिना ब्याज वाला ऋण (Interest-free loan) दे रही है। निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि यह ऋण अपनी लंबी अवधि और बिना ब्याज की शर्तों के कारण वास्तव में एक ‘ग्रांट’ (अनुदान) के समान है, जो राज्यों के विकास कार्यों में मील का पत्थर साबित होगा।
शिक्षा और कौशल का एकीकरण: सीधे उद्यमिता की ओर कदम
निर्मला सीतारमण ने शिक्षा प्रणाली में एक बड़े बदलाव का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अब छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद हुनर सीखने के लिए अलग से समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। कौशल विकास को शिक्षा के पाठ्यक्रम का ही हिस्सा बनाया जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि शिक्षा और कौशल साथ-साथ चलें ताकि छात्र डिग्री लेकर बाहर निकलते ही यह कह सकें कि वे उद्यमी बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।” यह पहल छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
औद्योगिक क्लस्टर्स के पास स्थापित होंगे ‘मेगा उद्यमिता निर्माण केंद्र’
शिक्षा को उद्योगों से जोड़ने के लिए सरकार राज्यों के सहयोग से ‘मेगा उद्यमिता निर्माण केंद्र’ (Mega Entrepreneurship Centres) स्थापित करने की योजना बना रही है। ये केंद्र किसी भी राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर्स के करीब बनाए जा सकते हैं। सीतारमण ने बताया कि ये मेगा सेंटर न केवल कौशल विकास का जरिया बनेंगे, बल्कि एक विशाल ‘शिक्षा हब’ के रूप में भी कार्य करेंगे। सरकार का उद्देश्य ऐसे उच्च शिक्षा केंद्र तैयार करना है जहां से छात्र एक सफल उद्यमी बनकर बाहर निकलें और खुद का व्यवसाय शुरू कर दूसरों को भी रोजगार प्रदान करें।
राज्यों के साथ सहयोग और उच्च शिक्षा का नया भविष्य
वित्त मंत्री ने अंत में दोहराया कि केंद्र सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। इन मेगा केंद्रों की स्थापना उच्च शिक्षा और व्यावसायिक कौशल के बीच की खाई को पाटने का काम करेगी। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि देश में नवाचार (Innovation) और उद्यमिता को भी नई दिशा मिलेगी। यह विजन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार भविष्य के भारत के लिए युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला (Job Creator) बनाना चाहती है।
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