Noida Car Accident: ‘पापा बचा लो’ पुकारते रहे युवराज, इंजीनियर की मौत पर CEO निलंबित, DM पर उठे सवाल

नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने प्रशासनिक सुरक्षा और रेस्क्यू तंत्र की पोल खोल दी है। घने कोहरे में निर्माणाधीन गड्ढे में कार गिरने के बाद 2 घंटे तक मदद के लिए तड़पते युवराज को बचाया नहीं जा सका। इस मामले में यूपी सरकार ने नोएडा CEO को हटा दिया है, वहीं विपक्षी दल AAP ने DM की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

Noida Car Accident

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 20, 2026

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Noida Car Accident: उत्तर प्रदेश के नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। 16–17 जनवरी की दरम्यानी रात घने कोहरे के बीच युवराज की कार सेक्टर-150 में एक असुरक्षित और गहरे गड्ढे में जा गिरी। बताया जा रहा है कि सुरक्षा दीवार टूटी होने के कारण यह सड़क दुर्घटना हुई। 27 वर्षीय युवराज ने मौत से पहले करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। कार की छत पर खड़े होकर वे मोबाइल की टॉर्च से इशारे करते रहे और पिता से फोन पर गुहार लगाते रहे—”पापा मुझे बचा लो”, लेकिन व्यवस्था की रेस्क्यू व्यवस्था की खामियां उनके जीवन पर भारी पड़ गईं।

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नोएडा अथॉरिटी पर गिरी गाज

आपको बता दे कि, इस जघन्य प्रशासनिक लापरवाही का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। घटना के बाद नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को तत्काल प्रभाव से हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो पांच दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। कार्रवाई के क्रम में एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया है और ट्रैफिक पुलिस व प्रबंधन से जुड़े कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

सौरभ भारद्वाज ने ‘राजनैतिक संरक्षण’ के लगाए आरोप

बताते चले कि, इंजीनियर की मौत के बाद विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार की कार्रवाई को दिखावा बताया है। पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोर्चा खोलते हुए कहा कि आईएएस अधिकारियों का महज तबादला करना सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं है। उन्होंने नोएडा की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चूंकि वे चुनाव आयुक्त की पुत्री हैं, इसलिए उन्हें राजनैतिक संरक्षण देकर बचाया जा रहा है। AAP नेता ने डीएम की सीधी जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

SDRF और रेस्क्यू ऑपरेशन की विफलता

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य बचाव कार्य की विफलता है। आरोप है कि जब युवराज डूबती कार की छत पर मदद के लिए चिल्ला रहे थे, तब मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौजूद थी। इसके बावजूद कोई भी उन्हें बचाने के लिए पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। यह घटना नोएडा जैसे हाई-टेक शहर में आपातकालीन बचाव तंत्र (Emergency Response System) की पोल खोलती है। युवराज करीब 90 से 120 मिनट तक जीवित रहे, लेकिन समय पर मदद न मिलने से उन्होंने दम तोड़ दिया।

निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी

गुरुग्राम से घर लौट रहे युवराज मेहता की मौत ने निर्माणाधीन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का बड़ा सवाल खड़ा किया है। कोहरे के मौसम में जब दृश्यता शून्य के करीब थी, तब खुले गड्ढे और टूटी बाउंड्री वॉल किसी ‘डेथ ट्रैप’ से कम नहीं थे। अब देखना यह होगा कि SIT की रिपोर्ट के बाद क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर गाज गिरेगी या नोएडा के उच्चाधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

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