
Noida Workers Protest: नोएडा की सड़कों पर उठता धुआं केवल आगजनी का नतीजा नहीं है, बल्कि यह ₹13,000 की सीमित सैलरी और टूटते सपनों की कहानी भी बयां करता है। जब तीन दिनों तक चले शांतिपूर्ण विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया, तो कर्मचारियों का गुस्सा भड़क उठा और हालात बेकाबू हो गए। अब सवाल यह उठता है कि क्या अपने अधिकारों की मांग के लिए हिंसा ही अंतिम विकल्प है? क्या लाठीचार्ज और आंसू गैस मजदूरों की आर्थिक परेशानियों का समाधान कर सकते हैं?










