Oil Crisis: पाकिस्तान के बाद अब इस देश में हाहाकार! पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25% का जोरदार उछाल

मिडिल ईस्ट संकट के बीच एक देश ने पेट्रोल-डीजल के दाम 25% बढ़ा दिए हैं। जनता से ईंधन का सीमित और सोच-समझकर उपयोग करने की अपील की गई है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 22, 2026

Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल और गैस की कमी ने कई देशों को संकट में डाल दिया है। इसी क्रम में श्रीलंका सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है।

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एक सप्ताह में दूसरी बार बढ़े दाम

Oil Crisis
पाकिस्तान के बाद अब इस देश में हाहाकार!

श्रीलंका में बीते एक सप्ताह के भीतर ही दूसरी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं। लगातार दो बार हुई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम 2022 के आर्थिक संकट के स्तर तक पहुंचने लगे हैं। यह स्थिति आम जनता के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर सीधा असर पड़ रहा है।

सरकार की अपील

श्रीलंका सरकार ने जनता से अपील की है कि वे ईंधन और बिजली का इस्तेमाल सीमित और सोच-समझकर करें। सरकार का कहना है कि वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता और संभावित कमी से निपटने के लिए ऊर्जा बचत बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने आधी रात से ईंधन के खुदरा दाम बढ़ाने का फैसला लिया।

ईंधन बचत के उपाय

ऊर्जा बचत को सुनिश्चित करने के लिए श्रीलंका सरकार ने प्रत्येक वाहन के लिए जारी क्यूआर कोड के आधार पर ईंधन की बिक्री शुरू की है। इस व्यवस्था के तहत हर वाहन को निश्चित मात्रा में ही ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से ईंधन की खपत नियंत्रित होगी और संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

वैश्विक संकट का असर

मिडिल ईस्ट संकट ने न केवल श्रीलंका बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के टकराव ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सीमित होने से वैश्विक तेल परिवहन प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है और कई देशों में महंगाई बढ़ रही है।

श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25% की बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि वैश्विक ऊर्जा संकट कितना गंभीर हो चुका है। सरकार द्वारा ईंधन बचत की अपील और क्यूआर कोड आधारित बिक्री व्यवस्था यह दर्शाती है कि हालात को संभालने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि मिडिल ईस्ट संघर्ष और बढ़ता है तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे आम जनता पर बोझ और बढ़ेगा।

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