Om Birla No Confidence Motion: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, जानें प्रक्रिया, आरोप, राजनीतिक गणित पूरी

संसद के गलियारों में हलचल तेज है क्योंकि विपक्षी गठबंधन 'INDIA' ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। क्या 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाला यह प्रस्ताव वाकई स्पीकर की कुर्सी हिला पाएगा या यह सिर्फ एक राजनीतिक संदेश है? संवैधानिक प्रक्रिया और बहुमत के गणित के बीच फंसी यह जंग अब कौन सा नया मोड़ लेगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 10, 2026

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Om Birla No Confidence Motion:  लोकसभा में विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Rule 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपकर सियासी हलचल तेज कर दी है। यह नोटिस लोकसभा महासचिव को दिया गया, जिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दल, राष्ट्रीय जनता दल समेत लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल इस पहल का हिस्सा हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस नोटिस से दूरी बनाकर रखी है, जिससे विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल उठे हैं।

कांग्रेस सांसदों ने सौंपा नोटिस

अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद लोकसभा महासचिव के कार्यालय पहुंचे। इन नेताओं ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव का पाठ सौंपते हुए आरोप लगाया कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता के संवैधानिक दायित्व का पालन नहीं किया। विपक्ष का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी था।

विपक्ष के आरोप: पक्षपात और आवाज दबाने का दावा

विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ने सदन में सरकार के पक्ष में झुकाव दिखाया और विपक्ष की आवाज को दबाया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि स्पीकर पर दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस दिन सदन में उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते स्पीकर को बयान देना पड़ा, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

नोटिस में उठाए गए चार प्रमुख बिंदु

अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में चार अहम आरोप दर्ज किए गए हैं। पहला, नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया गया। दूसरा, विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया। तीसरा, एक बीजेपी सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने की अनुमति दी गई। चौथा, स्पीकर द्वारा कांग्रेस सांसदों पर साजिश का आरोप लगाया गया, जिसे विपक्ष ने अस्वीकार्य बताया।

स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा की कार्यप्रणाली से जुड़े नियमों द्वारा नियंत्रित होती है। प्रस्ताव के लिए महासचिव को लिखित नोटिस देना होता है, जिसमें आरोप स्पष्ट और सटीक शब्दों में दर्ज हों। इसमें तर्क, व्यंग्य, मानहानिकारक या अनुमान आधारित बातें शामिल नहीं होनी चाहिए।

प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान की शर्तें

नोटिस मिलने के बाद प्रस्ताव को कार्यसूची में शामिल किया जाता है और इसके लिए तारीख तय की जाती है, जो नोटिस की तारीख से कम से कम 14 दिन बाद होती है। प्रस्ताव को कम से कम 50 सांसदों का समर्थन चाहिए। आमतौर पर स्वीकृति के 10 दिनों के भीतर चर्चा और मतदान होता है। इस दौरान स्पीकर या डिप्टी स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।

राजनीतिक गणित और प्रस्ताव की संभावनाएं

हालांकि विपक्ष के पास 220 से अधिक सांसद हैं, जिससे प्रस्ताव लाना आसान है, लेकिन इसे पारित कराना बेहद मुश्किल माना जा रहा है। लोकसभा में एनडीए के पास बहुमत है, जिसके चलते अविश्वास प्रस्ताव के सफल होने की संभावना कम है। इसके बावजूद, विपक्ष इसे सरकार और स्पीकर के खिलाफ राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहा है।

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