OP Rajbhar Akhilesh Yadav : सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बयानों से हलचल मचाने वाले राजभर ने इस बार सीधे अखिलेश यादव के पुराने कार्यकाल की याद दिलाते हुए उन पर तीखा तंज कसा है। ओम प्रकाश राजभर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने सीधे शब्दों में लिखा कि सपा का गढ़ असल में आतंकवाद की जड़ है। इस बयान के बाद यूपी का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है।
राजभर का सोशल मीडिया पर ‘सुप्रभात’ तंज
ओम प्रकाश राजभर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से अखिलेश यादव को टैग करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में ‘सुप्रभात’ कहा और उनका हालचाल पूछा। राजभर ने अपनी पोस्ट में चुटकी लेते हुए लिखा कि उन्हें इस बात की केवल उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा भरोसा है कि हमेशा की तरह अखिलेश यादव जमीनी हकीकत से बेखबर, अपनी धुन में मस्त और बिना किसी ठोस काम के ही व्यस्त होंगे। राजभर ने आगे लिखा कि खैर कोई बात नहीं, आप ऐसे ही बने रहिए, लेकिन आज 6 जून है और उन्होंने सोचा कि इतिहास की एक बेहद महत्वपूर्ण तारीख अखिलेश को याद दिला दी जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार की याद दिलाई
राजभर ने अखिलेश यादव को साल 2013 के एक मामले की याद दिलाते हुए लिखा कि आज ही के दिन यानी 6 जून 2013 को तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक कड़ा सवाल पूछकर बुरी तरह रगड़ा था। उन्होंने पूछा कि क्या अखिलेश यादव को वह दिन और कोर्ट की वह सख्त टिप्पणी याद है? राजभर ने इस बात पर जोर दिया कि उस समय की सपा सरकार के फैसलों ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया था, जिस पर देश की न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
पुराने पापों का स्क्रीनशॉट किया साझा
अपने दावों को साबित करने के लिए ओम प्रकाश राजभर ने उस समय की एक प्रमुख खबर का स्क्रीनशॉट भी अपनी पोस्ट के साथ अटैच किया है। उन्होंने अखिलेश यादव से कहा कि वे इस स्क्रीनशॉट को ध्यान से पढ़ लें ताकि कम से कम उन्हें अपने शासनकाल के दौरान किए गए ‘पाप’ दोबारा याद आ सकें। राजभर ने आगे तंज कसते हुए कहा कि जब समाजवादी पार्टी साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारेगी, तब वे अपनी हार का ठीकरा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) या प्रशासनिक अधिकारियों (SIR) पर नहीं फोड़ पाएंगे।
सपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं को नसीहत
ओपी राजभर केवल अखिलेश यादव पर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थकों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि जो लोग उन्हें दिन-रात गालियां देकर मानसिक संतोष पाते हैं, उन ‘सपाई लोडरों’ के लिए वे इस पूरे मामले को हिंदी में साफ-साफ लिख रहे हैं। राजभर ने कहा कि सपा कार्यकर्ता इस इतिहास को अच्छी तरह पढ़ लें ताकि उन्हें कम से कम यह समझ आ सके कि जिस राजनीतिक परिवार के लिए वे जमीन पर दरी बिछा रहे हैं, उसने अतीत में राज्य के साथ क्या-क्या किया था।
आतंकियों के मुकदमे वापस लेने का मामला
राजभर द्वारा शेयर किए गए खबर के स्क्रीनशॉट में साफ लिखा था कि आतंकियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के अखिलेश सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया था। साल 2007 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद (अयोध्या) की कचहरियों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज केसों को वापस लेने के समाजवादी पार्टी सरकार के नीतिगत फैसले पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए थे। उच्च न्यायालय ने बेहद नाराजगी जताते हुए सरकार से दो दिनों के भीतर सभी आरोपियों की पूरी सूची मांगी थी।
धमाकों की त्रासदी और सरकारी फैसला
सुभासपा प्रमुख ने जनता को याद दिलाया कि 2007 में हुए उन दर्दनाक और कायरतापूर्ण बम धमाकों में कुल 16 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जबकि 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हो गए थे। राजभर का आरोप है कि वोट बैंक की तुष्टिकरण की राजनीति के तहत समाजवादी पार्टी की सरकार उन खूंखार आरोपियों को कोर्ट से राहत देने और उनके मुकदमे वापस लेने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने साफ किया कि सपा का यह इतिहास गवाह है कि उन्होंने हमेशा अपराधियों और राष्ट्रविरोधी तत्वों को संरक्षण देने का काम किया है।
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