PM Modi Speech: संसद के वर्तमान सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यसभा में अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन इससे पहले बुधवार को लोकसभा में जो कुछ हुआ, वह संसदीय इतिहास के लिए एक दुखद अध्याय बन गया। विपक्षी दलों के निरंतर हंगामे और शोर-शराबे के कारण प्रधानमंत्री लोकसभा में अपना वक्तव्य नहीं दे सके। अंततः, सदन की कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए लोकसभा ने प्रधानमंत्री के औपचारिक जवाब के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ को पारित कर दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद किस कदर गहरे हो गए हैं।
लोकसभा अध्यक्ष की चिंता: संसदीय गरिमा पर ‘काला धब्बा’ और सुरक्षा का सवाल
सदन में हुए अभूतपूर्व हंगामे पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने सदन को सूचित किया कि बीते दिन विपक्षी खेमे, विशेषकर कांग्रेस के कुछ नेताओं का व्यवहार सामान्य नहीं था। अध्यक्ष के अनुसार, उन्हें ऐसी जानकारी मिली थी कि कुछ सदस्य सदन के भीतर किसी ‘अप्रत्याशित घटना’ को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इसी सुरक्षा और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, अध्यक्ष के स्वयं के अनुरोध पर प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को सदन में नहीं आए। ओम बिरला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकसभा के गठन से लेकर आज तक विपक्षी सदस्यों का ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा गया। उन्होंने इस घटनाक्रम को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास पर एक ‘काले धब्बे’ की संज्ञा दी।
10 साल का रिपोर्ट कार्ड: नया वर्क कल्चर और 25 करोड़ लोगों की गरीबी से मुक्ति
दूसरी ओर, राज्यसभा में चर्चा के दौरान भाजपा सांसदों ने पिछले एक दशक में आए बदलावों का पुरजोर समर्थन किया। सत्ता पक्ष के सदस्यों का तर्क है कि पिछले 10 वर्षों में देश की कार्यसंस्कृति (वर्क कल्चर) में आमूलचूल परिवर्तन आया है। सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का ही परिणाम है कि देश के लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। चर्चा में भाग लेते हुए सांसद माया नारोलिया ने कहा कि वर्ष 2026 ‘नए भारत’ के निर्माण का एक निर्णायक चरण साबित होगा। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसमें गुरु तेग बहादुर जैसे महापुरुषों का स्मरण करना राष्ट्र निर्माण के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है।
कल्याणकारी नीतियां: आयुष्मान भारत से लेकर किसान सम्मान निधि तक का प्रभाव
सरकार की नीतियों का बचाव करते हुए सांसदों ने कहा कि अब केवल ‘गरीबी हटाओ’ के नारे नहीं दिए जाते, बल्कि धरातल पर काम हो रहा है। आयुष्मान भारत योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसके माध्यम से देश के करोड़ों गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। इसके साथ ही, पीएम किसान सम्मान निधि योजना ने सीधे किसानों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुँचाकर उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार किया है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि कृषि उत्पादन के क्षेत्र में भारत अब न केवल आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। मोदी सरकार का विजन और कार्यक्रम भविष्य के विकसित भारत की आधारशिला रख रहे हैं।
उन्होंने कहा, मोदी सरकार की नीतियों, कार्यक्रम और विजन के चलते आज 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं. पहले केवल गरीबी हटाओं की बात की जाती थी. आयुष्मान भारत योजना से गरीबों को निशुल्क इलाज दिया जा रहा है. किसान सम्मान निधि योजना से किसानों को आर्थिक मदद दी जा रही है. कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ी है.
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