Arvind Kejriwal on Kewal Singh Dhillon: पंजाब में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने अनुभवी नेता केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इससे पहले यह अहम जिम्मेदारी सुनील जाखड़ निभा रहे थे। केवल सिंह ढिल्लों, जो अब तक पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपकर भाजपा ने संगठन को मजबूती देने की कोशिश की है। यह बदलाव आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा की नई सियासी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
अरविंद केजरीवाल का बीजेपी पर हमला
बताते चले कि, इस नियुक्ति के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर करारा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने कहा कि केवल ढिल्लों को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने पंजाब का चुनावी मैदान छोड़ दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ”भाजपा का पंजाब में चुनाव प्रचार अब केवल ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) की रेड तक ही सीमित रह जाएगा। पिछली कुछ रेड में बीजेपी को समझ जाना चाहिए था कि पंजाब की जनता इन सस्ती और टुच्ची मुच्ची धमकियों से डरने वाली नहीं है।”
केवल सिंह ढिल्लों का राजनीतिक सफर
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, नवनियुक्त अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों का राजनीतिक करियर काफी पुराना और रोचक रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। ढिल्लों ने 2007 और 2012 में बरनाला विधानसभा सीट से जीत हासिल की और विधायक बने। इसके बाद, राजनीति की बदलती धारा के साथ वे 2022 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और पकड़ को देखते हुए ही भाजपा नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी है, ताकि संगठन को धरातल पर सक्रिय किया जा सके।
आम आदमी पार्टी पर ढिल्लों का पलटवार
पदभार संभालने के साथ ही केवल सिंह ढिल्लों ने चुनावी मोड में आते हुए ‘आप’ सरकार को घेरा है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पंजाब में शानदार प्रदर्शन करेगी। ढिल्लों ने आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘आप’ ने सत्ता में आने से पहले पंजाब की जनता से जो बड़े-बड़े वादे किए थे, वे चार साल बीत जाने के बाद भी पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने जनता से किए गए वादों के अधूरे रहने का मुद्दा उठाकर चुनाव से पहले ही राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ढिल्लों का यह नया नेतृत्व आगामी चुनावों में पंजाब के सियासी समीकरणों को किस दिशा में ले जाता है।








