Rafale MICA Missiles: भारत में होगी राफेल की MICA मिसाइलों की मरम्मत, फ्रांस से बड़ा समझौता

भारत और फ्रांस के बीच हुए इस बड़े समझौते के तहत अब राफेल और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत और आधुनिकीकरण भारत में ही किया जा सकेगा।

Rafale MICA Missiles

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 12, 2026

Rafale MICA Missiles: भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अब भारतीय वायुसेना (IAF) अपने राफेल और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत और आधुनिकीकरण देश में ही कर सकेगी। इस संबंध में फ्रांसीसी रक्षा कंपनी MBDA और भारतीय वायुसेना के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।

इस समझौते के तहत भारत में MICA मिसाइलों के रखरखाव, मरम्मत और मध्यम स्तर के आधुनिकीकरण के लिए विशेष सुविधा स्थापित की जाएगी। लंबे समय से भारत इस तकनीकी सहयोग के लिए प्रयास कर रहा था और अब जाकर यह समझौता संभव हो पाया है।

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भारत में बनेगा MICA मिसाइल मरम्मत केंद्र

नई व्यवस्था के तहत भारतीय वायुसेना देश में ही MICA मिसाइलों के लिए घरेलू मरम्मत केंद्र स्थापित करेगी। इस परियोजना में फ्रांसीसी कंपनी MBDA तकनीकी सहायता, जरूरी कलपुर्जे, दस्तावेज और प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगी।

इस फैसले से भारत को विदेशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। अब खराब या रखरखाव की जरूरत वाली मिसाइलों को फ्रांस भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे समय की बचत होगी और भारतीय वायुसेना की युद्धक तैयारियों को भी मजबूती मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर मरम्मत और ओवरहॉल की सुविधा मिलने से संकट या युद्ध जैसी स्थिति में मिसाइलों की उपलब्धता तेजी से सुनिश्चित की जा सकेगी।

राफेल और मिराज-2000 विमानों को होगा फायदा

यह समझौता खासतौर पर भारतीय वायुसेना के राफेल और आधुनिकीकृत मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों ही विमान MICA हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, समझौते में इन मिसाइलों के मध्यम स्तर के अपग्रेड और तकनीकी सुधार का भी प्रावधान शामिल है। इससे भारतीय वायुसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमता दोनों में बढ़ोतरी होगी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत

बताया जा रहा है कि इस फैसले की पृष्ठभूमि हालिया सैन्य अभियानों से भी जुड़ी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने लंबी दूरी की मिसाइलों और वायु रक्षा प्रणालियों का सक्रिय उपयोग किया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि देश में ही मिसाइलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण की सुविधा होना बेहद जरूरी है। स्थानीय सुविधा विकसित होने से मिसाइलों की उपलब्धता लगातार बनी रहेगी और आपात स्थिति में वायुसेना की तैयारी प्रभावित नहीं होगी।

क्या होती है MICA मिसाइल?

MICA एक आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली फ्रांसीसी मिसाइल प्रणाली है। इसका पूरा नाम “Missile d’Interception, de Combat et d’Auto-défense” है। यह हर मौसम में काम करने वाली “फायर एंड फॉरगेट” मिसाइल मानी जाती है, जिसे MBDA फ्रांस ने विकसित किया है।

यह मिसाइल दो अलग-अलग संस्करणों में उपलब्ध है—

MICA-RF : इसमें सक्रिय रडार सीकर लगा होता है।

MICA-IR : इसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर का उपयोग किया जाता है।

दोनों मिसाइलें लंबी दूरी और करीबी हवाई युद्ध में दुश्मन के लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। इनकी मारक क्षमता लगभग 60 से 80 किलोमीटर तक मानी जाती है। करीब 112 किलोग्राम वजन वाली यह मिसाइल लगभग मैक-4 की रफ्तार तक पहुंच सकती है और इसमें 12 किलोग्राम का उच्च-विस्फोटक वारहेड लगाया जाता है।

कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुआ आधुनिकीकरण

1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत ने अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देना शुरू किया था। इसी दौरान मिराज-2000 विमानों को आधुनिक बनाने और MICA मिसाइलों को शामिल करने की योजना तैयार की गई। साल 2011 में भारत और फ्रांस के बीच 50 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के अपग्रेड के लिए समझौता हुआ था। इसके तहत आधुनिक MICA मिसाइलों को भी भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।

रणनीतिक दृष्टि से अहम समझौता

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारत की “आत्मनिर्भर रक्षा नीति” को मजबूत करने वाला कदम है। इससे न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि युद्ध के समय विदेशी सहायता पर निर्भरता भी कम होगी। भारत भविष्य में और अधिक राफेल विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है। ऐसे में MICA मिसाइलों के लिए घरेलू मरम्मत और रखरखाव केंद्र का निर्माण भारतीय रक्षा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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