Rahul Gandhi Congress: 6 जून से दिल्ली में महा-संग्राम! दलित-मुस्लिम गठबंधन के लिए राहुल गांधी का सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’!

2026 के चुनावी रण को फतह करने के लिए कांग्रेस का सबसे बड़ा चक्रव्यूह तैयार! 6 जून को दिल्ली के महा-सम्मेलन में दलित-मुस्लिम और शोषित समाज को एकजुट करने का जो गुप्त रोडमैप बनेगा

Rahul Gandhi Congress

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 5, 2026

Rahul Gandhi Congress: आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल सातवें आसमान पर पहुंच गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘संविधान बचाओ’ के नारे से बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद, अब कांग्रेस पार्टी देश की सियासत में एक बहुत बड़ा और नया ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेलने जा रही है। कांग्रेस ने दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ओबीसी (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों (EWS) को एक ही मंच पर लाने के लिए एक महा-रणनीति तैयार की है। इस चक्रव्यूह की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से होने जा रही है, जहां कांग्रेस एक अभेद्य सोशल इंजीनियरिंग का ताना-बाना बुन रही है।

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6 जून से दिल्ली में महा-अभियान

कांग्रेस के इस नए और आक्रामक चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत 6 जून को दिल्ली में होने वाले एक बहुत बड़े संयुक्त सम्मेलन से होने जा रही है। इस सोशल इंजीनियरिंग के पीछे का असली इनसाइड गेम क्या है, वो हम आपको आगे बताएंगे… लेकिन उससे पहले हम आपको ये बताते हैं कि इस दिल्ली सम्मेलन में क्या खास होने वाला है? इस बैठक में सिर्फ कांग्रेस के बड़े नेता और कार्यकर्ता ही नहीं जुटेंगे, बल्कि देशभर के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, लेखक, कलाकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी शामिल होने जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और अल्पसंख्यक विभाग ने मिलकर इस पूरे महा-अधिवेशन का खाका खींचा है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक मुद्दों पर चर्चा करके एक ऐसा ठोस रोडमैप तैयार करना है, जिससे सीधे चुनावी रण को फतह किया जा सके।

35-40% वोट बैंक पर सीधी नजर

दिल्ली के इस सम्मेलन में जो रोडमैप तैयार होगा, उसे तुरंत कांग्रेस आलाकमान के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके ठीक बाद कांग्रेस इस मॉडल को सीधे उन चुनावी राज्यों में लागू करेगी जहां सत्ता की असली जंग होनी है। दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में ताबड़तोड़ इसी तरह के प्रांतीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां दलित और अल्पसंख्यक आबादी मिलकर करीब 35 से 40 फीसदी का एक बहुत बड़ा और निर्णायक वोट बैंक रखती है। कांग्रेस को पूरा भरोसा है कि अगर इस विशाल आबादी को एक साझा राजनीतिक मंच पर ला दिया गया, तो विरोधी दलों के सारे सियासी समीकरण ताश के पत्तों की तरह ढह जाएंगे। आगे चलकर इस गठबंधन में अति पिछड़े वर्ग और गरीब सवर्णों को भी जोड़ने की पूरी तैयारी है।

‘संविधान बचाओ’ की सफलता से गदगद राहुल

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय चेयरपर्सन राजेंद्र पाल गौतम ने साफ किया है कि इस सामाजिक न्याय की लड़ाई में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी खुद कमान संभालेंगे। कांग्रेस के हौसले इस वक्त इसलिए भी बुलंद हैं क्योंकि पिछले आम चुनाव में राहुल गांधी के ‘संविधान बचाओ’ अभियान को दलित और शोषित समाज का भारी समर्थन मिला था।

अंदर की खबर यह है कि राहुल गांधी ने हाल ही में अल्पसंख्यक नेताओं के साथ बंद कमरे में हुई बैठकों में बिल्कुल साफ और कड़ा संदेश दिया है। राहुल ने दोटूक कहा है कि देश में किसी भी समुदाय के साथ होने वाले अन्याय और हक की लड़ाई को पूरी आक्रामकता और स्पष्टता के साथ उठाया जाना चाहिए। नेताओं को अब बैकफुट पर रहने के बजाय फ्रंटफुट पर आकर खुलकर बल्लेबाजी करनी होगी।

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