Women Reservation Bill : राहुल गांधी का बड़ा आरोप, ‘महिला बिल तो बहाना था, देश का पॉलिटिकल स्ट्रक्चर बदलना असली निशाना’

लोकसभा में बिल गिरने के तुरंत बाद राहुल गांधी ने मीडिया के सामने आकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी महिलाओं के नाम पर परिसीमन का ऐसा जाल बुन रही है जिससे दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व आधा रह जाएगा। क्या यह बिल वास्तव में भारत के संघीय ढांचे के लिए खतरा था?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 17, 2026

Women Reservation Bill : भारतीय संसदीय इतिहास में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। महिला आरक्षण और नए परिसीमन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिर गया है। सरकार इस ऐतिहासिक बिल को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही। सदन में मौजूद 528 सांसदों में से सरकार को बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की दरकार थी, लेकिन पक्ष में केवल 298 वोट ही पड़े। वहीं, 230 सांसदों ने इस विधेयक के विरोध में मतदान किया। इस विफलता के बाद विपक्ष के तेवर कड़े हैं और उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है।

राहुल गांधी का प्रहार: राजनीतिक ढांचे को बदलने की साजिश नाकाम

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिल के गिरने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे संविधान की रक्षा से जोड़ा। उन्होंने कहा, “हमने संविधान पर होने वाले एक बड़े हमले को सफलतापूर्वक विफल कर दिया है।” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का यह प्रस्ताव वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए नहीं था, बल्कि इसके जरिए भारत के मौजूदा राजनीतिक ढांचे (Political Structure) को बदलने की एक गुप्त कोशिश की जा रही थी। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष महिलाओं के प्रतिनिधित्व का समर्थक है, लेकिन सरकार की मंशा पर उन्हें गहरा संदेह था।

प्रियंका गांधी का तर्क: शर्तों के बोझ तले दबा दिया गया आरक्षण

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस हार के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार की रणनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस स्वरूप में बिल पेश किया, उसका पास होना लगभग असंभव था। प्रियंका गांधी के अनुसार, महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन जैसी जटिल शर्तों से जोड़ना ही इसकी विफलता का मुख्य कारण बना। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने के पक्ष में कभी नहीं थी। प्रियंका ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि यह केवल महिलाओं का नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों का सवाल है।

भाजपा पर तीखा पलटवार: हाथरस और मणिपुर की याद दिलाई

सदन में चर्चा के दौरान भाजपा द्वारा विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ बताए जाने पर प्रियंका गांधी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने भाजपा को घेरते हुए कहा कि जो लोग हाथरस, उन्नाव और मणिपुर जैसी घटनाओं पर चुप्पी साधे रहे और कोई सख्त कदम नहीं उठाया, वे आज महिला सुरक्षा और सम्मान की बात कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता असलियत जानती है कि कौन महिलाओं के अधिकारों के प्रति कितना गंभीर है।

अखिलेश यादव का बयान: कोशिश में रह गई कोई बड़ी कमी

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सपा हमेशा से महिला आरक्षण की पक्षधर रही है, लेकिन जिस तरह से ‘गाड़ी थम गई’, उससे लगता है कि सरकार की कोशिशों में कहीं न कहीं कोई बड़ी कमी रह गई थी। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों का विरोध नहीं किया, बल्कि उन प्रावधानों का विरोध किया जो महिलाओं के वास्तविक हक का हनन कर सकते थे। उन्होंने कहा, “विपक्ष ने जो लक्ष्मण रेखा खींची थी, सरकार उसे पार नहीं कर पाई।”

भविष्य की रणनीति और लोकतांत्रिक गतिरोध

बिल के गिरने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की नकारात्मकता बताकर प्रचारित कर सकता है। इस मतदान ने यह साफ कर दिया है कि बिना व्यापक आम सहमति और सामाजिक न्याय (OBC कोटा) के प्रावधानों के, ऐसे बड़े संवैधानिक बदलावों को जमीन पर उतारना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। फिलहाल, सदन की इस कार्यवाही ने 2029 के चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

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