Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर दान चोरी मामले में CBI जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को करेगा सुनवाई

**राम मंदिर दान मामले में कथित अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोपों की CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। याचिकाओं में स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। फिलहाल मामले में आरोपों पर न्यायिक विचार होना बाकी है और अदालत का अंतिम फैसला आना शेष है।

Ram Mandir Donation Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 10, 2026

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Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित चोरी और अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील विषय पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी, जिसमें जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल होंगे। यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा है, जिसे लेकर दायर की गई तीन जनहित याचिकाओं पर अदालत अपना रुख स्पष्ट करेगी। इन याचिकाओं ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिन पर देशभर की निगाहें टिकी हैं।

सीबीआई जांच और एसआईटी गठन की मांग

याचिकाकर्ताओं—वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी, वकील अजय कुमार राय और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह—ने अपनी याचिकाओं में मंदिर दान में हुई कथित धांधली की निष्पक्ष जांच की मांग की है। याचिकाओं में प्रमुख रूप से इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने या एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर जो अनियमितताएं सामने आई हैं, उनकी गहन और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाए, जो मंदिर के दान प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर सके।

फोरेंसिक ऑडिट और दान का होगा सार्वजनिक ब्यौरा

याचिकाओं में केवल जांच की मांग ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षात्मक उपायों पर भी जोर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का व्यापक ‘फोरेंसिक ऑडिट’ कराया जाए। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण सुझाव यह दिया गया है कि मंदिर को प्राप्त होने वाले दान का विवरण और उसका लेखा-जोखा पारदर्शी तरीके से मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव और सार्वजनिक किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वे ऐसे निर्देश जारी करें जिनसे श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास बना रहे और दान का दुरुपयोग होने से पूरी तरह रोका जा सके।

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और ट्रस्ट की पारदर्शिता का मुद्दा

याचिकाओं में मंदिर परिसर में चढ़ावे को ‘पवित्र ट्रस्ट की संपत्ति’ घोषित करने की भी मांग की गई है। इस कानूनी दलील का उद्देश्य मंदिर की धन-संपदा को विशेष सुरक्षा प्रदान करना है ताकि इसके प्रबंधन में कोई व्यक्तिगत या अनैतिक हस्तक्षेप न हो सके। याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा केवल वित्तीय गड़बड़ी का नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों भक्तों की भावनाओं और आस्था से जुड़ा हुआ है। ट्रस्ट के प्रबंधन को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना समय की मांग है। अब 13 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट इन मांगों पर क्या आदेश देता है और क्या मंदिर प्रबंधन में बड़े बदलावों की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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