Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी रडार पर, SIT की रिपोर्ट से मची हलचल

अयोध्या के राम मंदिर में वित्तीय प्रबंधन और चढ़ावे की जांच कर रही SIT ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। टीम ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ अब कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका की गहन पड़ताल की है। अगले दो दिनों में रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा।

Ayodhya Ram Mandir

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 16, 2026

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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, जांच अब अपने अंतिम चरण में है और SIT ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस गहन जांच के दायरे में महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के साथ-साथ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की प्रशासनिक एवं वित्तीय जिम्मेदारियाँ मुख्य रूप से शामिल हैं।

चढ़ावा प्रबंधन और वित्तीय निगरानी की गहन पड़ताल

बताते चले कि, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर 13 जून को गठित तीन सदस्यीय SIT ने 15 जून से ही दस्तावेजों की छानबीन शुरू कर दी थी। जुलाई के अपने हालिया दो दिवसीय दौरे में SIT का मुख्य ध्यान मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय निगरानी में कोषाध्यक्ष की भूमिका का बारीकी से आकलन करना रहा। इस दौरान SIT की टीम ने वैदेही भवन का भी दौरा किया, जहां स्वामी गोविंद देव गिरि का प्रवास होता है। टीम ने वहां के सेवादारों से प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर विस्तृत पूछताछ की और वित्तीय अभिलेखों का सत्यापन किया, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

दो दिनों के भीतर शासन को सौंपी जाएगी अंतिम रिपोर्ट

प्राप्त जानकारी के अनुसार, SIT अगले 48 घंटों के भीतर उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी अंतिम और व्यापक रिपोर्ट सौंप सकती है। मामला अत्यंत संवेदनशील होने के कारण, राज्य सरकार इस रिपोर्ट को प्राप्त करने के बाद इसे सीलबंद लिफाफे में सीधे सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल करने की तैयारी में है। यह रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज और शीर्ष पदाधिकारियों की कार्यशैली को लेकर एक स्पष्ट तस्वीर पेश करेगी।

राम मंदिर प्रबंधन में हो सकते हैं बड़े प्रशासनिक बदलाव

इस अंतिम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने या शासन के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों का पटाक्षेप होने की संभावना है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार भविष्य में मंदिर प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए कई बड़े और कड़े प्रशासनिक फैसले ले सकती है। अयोध्या में इस जांच रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में काफी गहमा-गहमी बनी हुई है।

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