Shantanu Sinha Arrested : ममता के करीबी पूर्व DCP शांतनु सिन्हा गिरफ्तार, सोना पप्पू मनी लॉन्ड्रिंग में कार्रवाई

कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोना पप्पू मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है। कई बार समन टालने और लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद हुई इस गिरफ्तारी ने बंगाल की राजनीति में तूफान ला दिया है। आखिर क्या हैं सिन्हा के सिंडिकेट संबंध?

Shantanu Sinha Arrested

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 14, 2026

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Shantanu Sinha Arrested : पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारे में उस समय हड़कंप मच गया, जब कोलकाता के पूर्व पुलिस उपायुक्त (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और संबंधित एजेंसियों की सक्रियता के बाद यह बड़ी सफलता हाथ लगी है। शांतनु सिन्हा पर आरोप है कि उन्होंने एक निष्पक्ष सरकारी अधिकारी के बजाय एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर अपनी सेवाएं दीं और सत्ता के संरक्षण में कई गंभीर घोटालों को अंजाम दिया।

लुकआउट नोटिस और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

शांतनु सिन्हा के खिलाफ यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। लगभग एक सप्ताह पहले उनके नाम पर एक ‘लुकआउट’ नोटिस जारी किया गया था। जांच एजेंसियों को पुख्ता जानकारी मिली थी कि शांतनु देश छोड़कर विदेश भागने की फिराक में हैं। इसी आशंका को देखते हुए सभी हवाई अड्डों और बंदरगाहों को सतर्क कर दिया गया था। पिछले महीने ईडी ने उनके आवास और उनसे जुड़े कई अन्य ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन के सबूत हाथ लगे थे।

सत्ता के करीबी और विवादित कार्यशैली

शांतनु सिन्हा बिस्वास को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी अधिकारी माना जाता रहा है। उनकी निष्ठा पर सवाल तब और गहरा गए जब उन्हें हाल ही में ममता सरकार के एक राजनीतिक धरने के दौरान मंच पर देखा गया था। एक वर्दीधारी अधिकारी का राजनीतिक मंच साझा करना प्रशासनिक मर्यादाओं के उल्लंघन के तौर पर देखा गया। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि शांतनु ने पद पर रहते हुए कानून का पालन करने के बजाय सत्ताधारी दल के एजेंडे को आगे बढ़ाया।

सोना पप्पू केस और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

उनकी गिरफ्तारी का मुख्य आधार ‘सोना पप्पू’ से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला है। जांच में यह सामने आया है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने अवैध रूप से अर्जित धन को सफेद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन पर जमीन कब्जाने, रंगदारी वसूली और बालू तस्करी से जुड़े वित्तीय लेन-देन के गंभीर आरोप हैं। बालू तस्करी के मामले में करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन के संकेत मिले हैं, जिसकी कड़ी सीधे तौर पर शांतनु से जुड़ी हुई पाई गई है।

कौन है सोनू पप्पू और क्या है विवाद?

सोनू पप्पू का नाम कोलकाता के अपराध जगत में नया नहीं है। इस साल फरवरी में कोलकाता के गोलपार्क इलाके में दो गुटों के बीच भीषण गैंगवार हुई थी, जिसमें जमकर बमबाजी और गोलीबारी हुई। इस हिंसा के पीछे सोनू पप्पू का हाथ बताया गया, जो इलाके में अपना वर्चस्व कायम करना चाहता था। सोनू पप्पू ने 2010-11 में कंस्ट्रक्शन व्यवसाय के जरिए अपराध की दुनिया में प्रवेश किया और धीरे-धीरे रेलवे यार्डों पर कब्जे और फिरौती जैसे मामलों में शामिल हो गया।

अपराध का लंबा इतिहास और पुलिस की भूमिका

सोनू पप्पू के खिलाफ हत्या और हमले के कई मामले दर्ज हैं। साल 2017 में स्विन्हो लेन इलाके में कब्जे को लेकर हुई पलाश जाना की हत्या में भी पप्पू का नाम आया था। हालांकि, उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वह जमानत पर बाहर आने में सफल रहा। आरोप है कि शांतनु सिन्हा जैसे अधिकारियों के संरक्षण के कारण ही ऐसे अपराधियों का नेटवर्क फलता-फूलता रहा। अब ईडी इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच कर रही है ताकि प्रशासन और अपराध के इस गठजोड़ को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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