भारत के लिए चौंकाने वाला खुलासा: रूस ने ट्रंप के तेल दावों की पोल खोली

मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाते हुए सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन रूस ने इस दावे पर साफ शब्दों में कहा है कि भारत की ओर से उसे ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद

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Published On :

फ़रवरी 3, 2026

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मॉस्को
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाते हुए सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन रूस ने इस दावे पर साफ शब्दों में कहा है कि भारत की ओर से उसे ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है और उन्हें आगे भी मज़बूत करना चाहता है।
 
ट्रंप का बड़ा ऐलान
ट्रंप ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इसी के साथ ट्रंप ने दावा किया था कि इसके बदले भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत के रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल रही है।

रूस की दो टूक
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा, “रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का ध्यान से विश्लेषण कर रहा है।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का फैसला किया है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, "अब तक तो हमने भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं सुना है।” उन्होंने कहा कि नई दिल्ली भारत-रूस साझेदारी को भी उतनी ही अहमियत देता है।

पेसकोव ने कहा, "हम द्विपक्षीय अमेरिकी-भारतीय संबंधों का सम्मान करते हैं लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हम उन्हें आगे भी विकसित करना चाहते हैं।”

तेल और कूटनीति
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने इस पर नाराज़गी जताई है और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि भारत का रुख हमेशा यही रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। बहरहाल, तस्वीर अभी साफ नहीं है क्योंकि एक तरफ ट्रंप का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ रूस का इनकार। भारत की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह साफ है कि तेल, व्यापार और कूटनीति का यह खेल अभी जारी रहेगा।

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