Sikkim Tunnel Collapse: नामची सुरंग हादसे में 20 मजदूरों की मौत, राहत अभियान जारी

सिक्किम के नामची में हुए दर्दनाक सुरंग हादसे में 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन और बचाव दल मौके पर जुटे हैं। आखिर हादसा कैसे हुआ, बचाव अभियान किस स्थिति में है और आगे क्या कार्रवाई होगी, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 22, 2026

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Sikkim Tunnel Collapse:  सिक्किम के नामची जिले में स्थित नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) की तीस्ता चरण-6 जलविद्युत परियोजना में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग के अचानक ध्वस्त होने से कई श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस दुर्घटना में कम से कम 20 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रमिक लंबे समय तक सुरंग के भीतर फंसे रहे। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रशासन ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।

हेड रेस टनल में हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक यह दुर्घटना दक्षिण सिक्किम के समरडुंग क्षेत्र में स्थित हेड रेस टनल (HRT) के भीतर हुई। बताया जा रहा है कि 20 जुलाई की दोपहर करीब एक बजे सुरंग के अंदर चट्टानों के बीच मौजूद संदिग्ध मीथेन गैस अचानक तेजी से बाहर निकली। इसके बाद जोरदार धमाका हुआ, जिससे सुरंग के ऊपरी हिस्से में भूस्खलन हो गया। कुछ ही क्षणों में सुरंग का बड़ा हिस्सा धुएं, धूल और गैस से भर गया, जिससे अंदर काम कर रहे श्रमिकों के लिए बाहर निकलना बेहद कठिन हो गया।

हादसे के समय सुरंग में मौजूद थे 27 मजदूर

दुर्घटना के समय सुरंग के भीतर कुल 27 श्रमिक कार्य कर रहे थे। विस्फोट और सुरंग ध्वस्त होने के बाद सभी मजदूर अंदर ही फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही एनएचपीसी की तकनीकी टीमों, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। राहत दल लगातार सुरंग के भीतर सुरक्षित रास्ता बनाने और फंसे हुए श्रमिकों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

युद्ध स्तर पर जारी है राहत और बचाव अभियान

हादसे के बाद एनएचपीसी का वरिष्ठ प्रबंधन भी मौके पर पहुंच गया है और बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रहा है। भारी मशीनों और विशेष तकनीकी उपकरणों की मदद से सुरंग में मलबा हटाने का कार्य जारी है। बचाव दल गैस के स्तर की निगरानी करते हुए सुरक्षित तरीके से अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि फंसे हुए श्रमिकों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके। प्रशासन ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर राहत अभियान तेज कर दिया है।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने जताया शोक

इस दुखद घटना पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक श्रमिकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक श्रमिक के परिवार को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने प्रशासन को राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखने के निर्देश दिए हैं।

प्रधानमंत्री ने भी घोषित की आर्थिक सहायता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से सहायता राशि देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। केंद्र सरकार ने भी स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया है।

फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता

फिलहाल प्रशासन और बचाव दल का पूरा ध्यान सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों की निगरानी में लगातार राहत अभियान चलाया जा रहा है और सुरंग के भीतर की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पूरे देश की निगाहें इस बचाव अभियान पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि शेष फंसे हुए श्रमिकों को जल्द सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील भी की है।

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