Sonia Gandhi Voter List Controversy: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शनिवार (18 अप्रैल, 2026) को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) में उनके खिलाफ दायर एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह मामला दशकों पुराने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़ा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनिया गांधी के कानूनी पक्ष को एक सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।
सोनिया गांधी के वकील को जवाब पेश करने का निर्देश
बताते चले कि, सुनवाई के दौरान आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (Criminal Revision Petition) पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने अपनी सभी दलीलें पूरी कर ली हैं और उन्होंने चुनाव आयोग की एक विशेष रिपोर्ट को साक्ष्य के तौर पर रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति मांगी है। दूसरी ओर, सोनिया गांधी के कानूनी सलाहकारों ने अदालत से समय मांगते हुए कहा कि वे अपने मुवक्किल के बचाव में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य और सबूत (Crucial Evidence) पेश करना चाहते हैं। कोर्ट ने अब इस कानूनी लड़ाई की अगली तारीख 16 मई निर्धारित की है।
नागरिकता और मतदाता पंजीकरण का विवाद
इस पूरे मामले की जड़ भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) मिलने से पहले मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के आरोपों में छिपी है। याचिकाकर्ता का दावा है कि सोनिया गांधी को आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिकता 1983 में प्राप्त हुई थी, लेकिन उनका नाम 1980 की मतदाता सूची (1980 Voter List) में पहले ही दर्ज हो चुका था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक विदेशी नागरिक होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन कर उनका नाम निर्वाचक नामावली में शामिल किया गया, जो कानूनी रूप से एक गंभीर विसंगति है।
कथित फर्जीवाड़ा और राजनीतिक प्रभाव
याचिकाकर्ता वकील विकास त्रिपाठी ने अदालत के समक्ष कुछ चौंकाने वाले दस्तावेज पेश किए हैं। उनके अनुसार, 1980 में नाम जुड़ने के बाद विवाद बढ़ने पर 1982 में उसे सूची से हटा दिया गया था, लेकिन नागरिकता मिलने के वर्ष यानी 1983 में इसे पुन: जोड़ दिया गया। याचिका में सीधा आरोप लगाया गया है कि 1980 में नाम का जुड़ना विशुद्ध रूप से फर्जीवाड़ा और राजनीतिक रसूख (Fraud and Political Influence) का परिणाम था। याचिकाकर्ता की मुख्य मांग यह है कि इस कथित धोखाधड़ी और संवैधानिक नियमों की अनदेखी के लिए सोनिया गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला (Criminal Case) दर्ज किया जाए।
पुरानी याचिकाओं का संदर्भ
यह कानूनी विवाद पिछले कुछ समय से सुर्खियों में है। इससे पहले 30 मार्च को भी इस मामले पर आंशिक सुनवाई हुई थी, जिसे बाद में स्थगित कर दिया गया था। उस समय अदालत ने बचाव पक्ष को 18 अप्रैल तक का समय दिया था। अब जबकि चुनाव आयोग की रिपोर्ट (Election Commission Report) और बचाव पक्ष के नए सबूतों की बात सामने आई है, तो 16 मई की सुनवाई बेहद निर्णायक होने वाली है। राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की साख से जुड़ा मुद्दा है।







