Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, CJI की पीठ ने दखल देने से क्यों किया साफ इनकार?

जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा सुधार और NTA को भंग करने की मांग कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हालांकि, CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने वकील को समय बर्बाद न करने की हिदायत देते हुए घटना के वीडियो देखने से भी मना कर दिया।

Jantar Mantar Protest

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 22, 2026

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मामला बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया। एक वकील द्वारा इस मामले में शीर्ष अदालत से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई गई थी। हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली पीठ ने इस याचिका पर किसी भी तरह का दखल देने से साफ मना कर दिया। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार के मामलों में कोर्ट का कीमती समय नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।

नीट परीक्षा और NTA को भंग करने की थी मांग

बताते चले कि, अदालत की कार्यवाही के दौरान एक अधिवक्ता ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने का मामला पीठ के समक्ष रखा। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि छात्र चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव करने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को तत्काल प्रभाव से भंग करने जैसी गंभीर मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। वकील ने दलील दी कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका का हस्तक्षेप जरूरी है। लेकिन, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया और कड़े शब्दों में कहा, “आप ऐसा करके अपना और हमारा, दोनों का समय बर्बाद कर रहे हैं।”

शीर्ष अदालत का वीडियो साक्ष्य देखने से इनकार

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, सुनवाई के दौरान जब वकील ने पुलिसिया कार्रवाई की गंभीरता को साबित करने के लिए घटना से जुड़े कुछ वीडियो फुटेज अदालत कक्ष में दिखाने की अनुमति मांगी, तो पीठ ने उस पर भी कड़ा रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा, ‘हमें इस मामले से जुड़े किसी भी वीडियो को देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है।’ अदालत ने प्रक्रियात्मक नियमों का हवाला देते हुए इस तरह के साक्ष्यों पर विचार करने से मना कर दिया और मामले को आगे सुनने से रोक दिया।

केंद्र और NTA से पहले ही मांगा जा चुका है जवाब

न्यायालय ने इस बात को भी रेखांकित किया कि नीट (NEET) परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित अनियमितताओं से जुड़ा मुख्य विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। उस मुख्य याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत पहले ही केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी कर उनका विस्तृत जवाब तलब कर चुकी है। पीठ का मानना था कि जब मूल संवैधानिक और प्रशासनिक मुद्दा पहले से ही अदालत के संज्ञान में है, तो आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस कार्रवाई के इस नए आग्रह पर अलग से कोई हस्तक्षेप करने का औचित्य नहीं बनता।