Tej Pratap Yadav: मकर संक्रांति के अवसर पर लालू यादव के परिवार में एक खुशियों भरा पल देखा गया। मंगलवार, 13 जनवरी को तेजप्रताप यादव अपने पिता और परिवार से मिलने के लिए 10 सर्कुलर रोड स्थित निवास पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी से भी मुलाकात की। यह मुलाकात पार्टी से निष्कासन के बाद तेजप्रताप और तेजस्वी की पहली आमने-सामने भेंट थी।
दही-चूड़ा भोज का न्यौता और पारिवारिक मिलन
तेजप्रताप यादव ने इस अवसर पर अपने परिवार को 14 जनवरी को आयोजित होने वाले दही-चूड़ा भोज के लिए आमंत्रित किया। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने इस ऐतिहासिक निमंत्रण की जानकारी साझा की। साथ ही इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में लेकर प्यार जताया, जो इस कार्यक्रम को और खास बना गया। तेजप्रताप ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी से आशीर्वाद प्राप्त किया और छोटे भाई तेजस्वी यादव से भेंट कर उन्हें दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया। यह परिवारिक मिलन और कार्यक्रम का निमंत्रण कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदेश रहा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और पार्टी गतिविधियां
तेजप्रताप यादव को आरजेडी से निष्कासित किए जाने के बाद उन्होंने जनशक्ति जनता दल नामक नई पार्टी बनाई। इसी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने महुआ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद, 2020 में हसनपुर से विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट बदलने का निर्णय लिया। तेजप्रताप के राजनीतिक करियर में यह कदम काफी चर्चा में रहा। उनकी नई पार्टी ने उन्हें अलग राजनीतिक पहचान देने की कोशिश की, जबकि आरजेडी ने भी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा।
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मंत्रियों और नेताओं को व्यक्तिगत निमंत्रण
मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी को तेजप्रताप यादव ने बिहार सरकार के कई मंत्रियों और अन्य नेताओं को भी दही-चूड़ा भोज में आमंत्रित किया। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, दिलीप कुमार जायसवाल, लखेंद्र कुमार, रमा निषाद, रामकृपाल यादव, अशोक चौधरी सहित अन्य नेताओं से मुलाकात की और उन्हें निमंत्रण दिया।
इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि तेजप्रताप यादव परिवारिक और राजनीतिक संबंधों को एक साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। दही-चूड़ा भोज का यह आयोजन सिर्फ एक पारंपरिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवार और राजनीतिक मेलजोल का प्रतीक भी माना जा रहा है।










