खुल सकता है होर्मुज का रास्ता, तेल बाजार में खुशी की लहर; डेढ़ महीने के निचले स्तर पर पहुंचा क्रूड

नई दिल्‍ली  खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्‍द ही खत्‍म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्‍द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्‍चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो शनिवार सुबह फिसलकर 6 सप्‍ताह यानी डेढ़ महीने के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि अब होर्मुज का रास्‍ता दोबारा खोला जा सकता है और ईंधन से लदे भारतीय जहाज सरपट भागने लगेंगे. इससे देश में पैदा हुआ क्रूड व

Wrriten By :

Editor

Published On :

मई 31, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

नई दिल्‍ली
 खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्‍द ही खत्‍म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्‍द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्‍चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो शनिवार सुबह फिसलकर 6 सप्‍ताह यानी डेढ़ महीने के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि अब होर्मुज का रास्‍ता दोबारा खोला जा सकता है और ईंधन से लदे भारतीय जहाज सरपट भागने लगेंगे. इससे देश में पैदा हुआ क्रूड व गैस का संकट भी जल्‍द ही खत्‍म हो जाएगा। 

ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में आज 2 फीसदी से भी ज्‍यादा की गिरावट दिख रही है. डब्‍ल्‍यूटीआई का भाव फिसलहर 87.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 91.12 डॉलर प्रति बैरल के भाव चल रही हैं. यह 6 सप्‍ताह का सबसे निचला स्‍तर है. अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर अंतिम बातचीत चल रही है. हालांकि, ईरान के विदेशी मंत्री का अब भी कहना है कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है. हालांकि, अमेरिका के तेवर देखकर लगता है कि वह ईरान के साथ न्‍यूक्लियर मुद्दे पर दोबारा नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकता है। 

फिर सस्‍ता हो जाएगा क्रूड
ग्‍लोबल एनर्जी एजेंसियों का कहना है कि होर्मुज के रास्‍ते में सैकड़ों जहाज खड़े-खड़े इंतजार कर रहे हैं. इस पर ईरान और अमेरिका दोनों ही अपना दावा ठोक रहे हैं और किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहे. अगर दोनों में समझौता होता है और होर्मुज से दोबारा कारोबार शुरू होता है तो जल्‍द ही कच्‍चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती हैं. फिलहाल इस गतिरोध की वजह से ग्‍लोबल मार्केट में क्रूड का भंडार करीब 2 करोड़ बैरल नीचे आ चुका है. विश्‍व बैंक, आईएमएफ सहित तमाम ग्‍लोबल एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचा तो गर्मी के महीने में ईंधन का संकट गहरा सकता है। 

भारत को सबसे बड़ी राहत
होर्मुज जलडमरूमध्‍य का रास्‍ता खुलता है तो सबसे ज्‍यादा लाभ भारत को होगा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्‍सा ईंधन इसी रास्‍ते से मंगाता है. जहाजरानी मंत्रालय में निदेशक ओपेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारत के लिए होर्मुज कितना महत्‍वपूर्ण इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम अपनी कुल जरूरत का करीब 30 फीसदी क्रूड ऑयल इसी रास्‍ते से मंगाते हैं. इतना ही नहीं, कुल एलपीजी आयात का 70 फीसदी भी इसी रास्‍ते से आता है. लिहाजा अगर शांति वार्ता कामयाब होती है और होर्मुज खुलता है तो भारतीय जहाजों के लिए यह सबसे बड़ी राहत होगी। 

होर्मुज में अभी हमारे कितने जहाज
ओपेश शर्मा का कहना है कि होर्मुज से अभी भारतीय झंडे वाले 13 जहाजों को ऑपरेट किया जा रहा है. इसमें एक एलपीजी टैंकर से लदा जहाज है, जबकि 5 जहाजों पर कच्‍चे तेल के टैंकर लदे हुए हैं. एक शिप रसायनों से भरा है, जिसका इस्‍तेमाल यूरिया व अन्‍य उर्वरक बनाने में किया जाता है, जबकि 3 कंटेनर लादने वाले शिप हैं और 2 जहाज बल्‍क कैरियर जबकि एक ड्रेगर के रूप में इस रास्‍ते पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है. उन्‍होंने बताया कि 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्‍चा तेल लादे एक टैंकर निसोस केरोस ने 25-26 मई को सफलतापूर्वक होर्मुज का रास्‍ता पार कर लिया है और इसके 3 जून तक विशाखापत्‍तन बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। 

2