TMC Crisis: बंगाल चुनाव हारते ही तृणमूल कांग्रेस में दो फाड़! फर्जी साइन विवाद से मची भारी खलबली

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक ऐसा भयंकर विस्फोट हुआ है जिसने पार्टी की नींव हिला दी है। नेता प्रतिपक्ष चुनने के पत्र पर 14 विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर के सनसनीखेज आरोप के बाद सीआईडी जांच और सामूहिक निष्कासन का यह गुप्त खेल आखिर कहां थमेगा?

TMC Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 2, 2026

TMC Crisis:  पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सियासी संकट के दिन शुरू हो गए हैं। राज्य में चुनावी पराजय के बाद जो नए राजनीतिक समीकरण और हालात बनते दिखाई दे रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि टीएमसी बहुत जल्द दो गुटों में पूरी तरह विभाजित हो सकती है। विधानसभा के भीतर नेता प्रतिपक्ष (नेता विपक्ष) की नियुक्ति के हाई-प्रोफाइल मामले ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सुलग रही आंतरिक फूट और असंतोष को पूरी तरह से चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।

ममता ने दो बागी विधायकों को पार्टी से निकाला

दरअसल, ममता बनर्जी ने अपने बेहद भरोसेमंद नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष के पद पर मनोनीत किया है। इस नियुक्ति को लेकर सूबे के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को सौंपे गए आधिकारिक पत्र पर कुछ टीएमसी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर (जाली साइन) किए गए थे। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर टीएमसी के दो विधायकों—रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा का नाम उजागर किया, जिन्होंने खुद इस जालसाजी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री के इन आरोपों के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में टीएमसी से निष्कासित कर दिया।

अभिषेक बनर्जी पर फूटा गुस्सा

विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद से ही टीएमसी के अंदर नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी तथा आपसी फूट दिनों-दिन और गहरी होती जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद आम है कि नाराज विधायकों का मुख्य गुस्सा पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर नहीं, बल्कि उनके भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के काम करने के तौर-तरीकों पर है। रविवार को यह अंदरूनी मतभेद उस समय पूरी तरह जगजाहिर हो गया, जब ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर बुलाई गई एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक में टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे, जबकि 60 विधायकों ने इस बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली।

पार्टी से निकाले गए विधायक का सनसनीखेज दावा

टीएमसी से बाहर का रास्ता दिखाए गए बागी विधायक संदीपन साहा ने मीडिया के सामने आकर इस पूरे विवाद के लिए सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के जनरल सेक्रेटरी (अभिषेक बनर्जी) के इशारे पर ही विधायकों की फर्जी सूची तैयार की गई थी और उन्होंने ही उस लिस्ट पर साइन किए थे। सूत्रों के हवाले से यह खबर भी सामने आ रही है कि नाराज और बागी टीएमसी विधायकों को शांत करने, उन्हें मनाने और सदन के भीतर पार्टी की साख को एकजुट बनाए रखने के लिए कोलकाता में शीर्ष नेताओं के बीच मैराथन बैठकों का दौर चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि ममता बनर्जी इस भीषण संकट से अपनी पार्टी को कैसे बाहर निकाल पाती हैं।

फर्जी साइन मामले की सीआईडी जांच शुरू

विधानसभा में फर्जी हस्ताक्षर का यह संवेदनशील मामला सामने आने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की सीआईडी (CID) ने आपराधिक मामला दर्ज कर अपनी जांच तेज कर दी है। इस जालसाजी के सिलसिले में सीआईडी ने तृणमूल कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं को पूछताछ के लिए कानूनी नोटिस जारी किए हैं। जांच एजेंसी ने इस मामले के मुख्य केंद्र माने जा रहे अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए समन भेजकर तलब किया था। हालांकि, राजनीतिक दबाव और विवादों के बीच अभिषेक बनर्जी तय समय पर सीआईडी के समक्ष पेश नहीं हुए, जिससे इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक सस्पेंस और अधिक बढ़ गया है।

सांसद काकोली घोष का इस्तीफा 

चुनाव हारने के बाद से टीएमसी अपने शीर्ष नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़े रखने के लिए लगातार कड़ा संघर्ष कर रही है। ममता बनर्जी की सत्ता जाने के बाद से कई सांसदों और विधायकों ने खुलकर अपनी ही लीडरशिप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने गहरी नाराजगी जताते हुए अपने जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस की इस दयनीय सांगठनिक स्थिति पर कड़ा तंज कसते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और शुभेंदु सरकार में कद्दावर मंत्री दिलीप घोष ने चुटकी ली। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “जिस रफ्तार से लोग पार्टी छोड़कर भाग रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि आने वाले दिनों में टीएमसी में सिर्फ ममता बनर्जी और उनके भतीजे ही अकेले बचेंगे।”

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