West Bengal Political Crisis: कल्याण बनर्जी की बागी सांसदों को ललकार, ‘हिम्मत है तो क्षेत्र में आकर दिखाएं’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) गहरे संकट में है। पार्टी के 20 से अधिक सांसद और 58 विधायक ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर बीजेपी के संपर्क में हैं। दिल्ली में भूपेंद्र यादव और अमित शाह से मुलाकातों के बाद बंगाल की सियासत गरमा गई है, जिससे ममता बनर्जी का राजनीतिक किला ढहने की कगार पर है।

West Bengal Political Crisis

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 9, 2026

West Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) गहरे राजनीतिक संकट में घिर गई है। पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा गुट अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के साथ जाने के लिए उतावला नजर आ रहा है। हाल ही में दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर टीएमसी के 14 से अधिक सांसदों की गोपनीय मुलाकात के बाद से बंगाल की राजनीति में खलबली मच गई है। इस बड़ी बगावत से तिलमिलाई टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इन बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘रीढ़विहीन’ और ‘गद्दार’ तक करार दे दिया है। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के एक दावे ने इस विवाद को और हवा दे दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि युसुफ पठान को खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह ने मुलाकात के लिए दिल्ली बुलाया था।

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह

कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में टीएमसी नेताओं का यह धड़ा भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर गया था। कल्याण बनर्जी के अनुसार, यह पूरी कवायद भाजपा में शामिल होने की शर्तों को तय करने के लिए की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये नेता चाहे जितने बहानों या शब्दों की जादूगरी का सहारा लें, लेकिन पश्चिम बंगाल की जनता इतनी नासमझ नहीं है कि सच को पहचान न सके। कल्याण बनर्जी ने दुख जताते हुए कहा कि अगर ये नेता किसी अन्य मंच पर वैचारिक चर्चा करते तो वह इसकी सराहना करते, लेकिन इन्होंने ममता बनर्जी के बजाय नरेंद्र मोदी को अपना नया नेता स्वीकार कर लिया है, जो पार्टी के साथ विश्वासघात है।

युसुफ पठान को लेकर कल्याण बनर्जी का बड़ा दावा

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब कल्याण बनर्जी ने पूर्व क्रिकेटर और सांसद युसुफ पठान को लेकर एक बड़ा खुलासा किया। बनर्जी ने दावा किया कि युसुफ पठान ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन करके दिल्ली आमंत्रित किया था और वह इसी सिलसिले में उनसे मुलाकात करने देश की राजधानी पहुंचे थे। टीएमसी नेतृत्व का मानना है कि भाजपा सोची-समझी रणनीति के तहत पार्टी के बड़े चेहरों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, जिससे ममता बनर्जी के राजनीतिक किले को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

टीएमसी सांसद ने राज्य सरकार को घेरा

पार्टी में मची इस उठापटक के बीच कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों को दिल्ली छोड़कर अपने-अपने क्षेत्रों में जाने की नसीहत दी है। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में इस वक्त लोकतंत्र पूरी तरह समाप्त हो चुका है और नौकरशाही तथा पुलिस राज का बोलबाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लगभग 8 हजार राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसके डर से लोग अपने घरों में नहीं बैठ पा रहे हैं। बनर्जी के मुताबिक, पुलिस द्वारा एफआईआर (FIR) को ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जा रहा है और न ही लोगों को हिरासत में लेने का वैधानिक आधार बताया जा रहा है, जो पूरी तरह से असंवैधानिक है। ऐसे कठिन समय में सांसदों को अपनी पीड़ित जनता के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि दिल्ली में सौदेबाजी करनी चाहिए।

बागी नेताओं को खुली चुनौती

कल्याण बनर्जी ने दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) का हवाला देते हुए बागी नेताओं को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि संविधान के नियम के अनुसार यदि दो-तिहाई (2/3) बहुमत हो, तभी कोई गुट कानूनी रूप से पार्टी से अलग हो सकता है। उन्होंने तंज कसा कि ये सांसद औपचारिक रूप से भाजपा में इसलिए शामिल नहीं हो रहे हैं क्योंकि भाजपा भी इन्हें सीधे स्वीकार करने में कतरा रही है। इस बीच, खबर है कि टीएमसी के 20 से अधिक सांसदों ने संसद सदन में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य गुट से अलग बैठने की व्यवस्था (Siting Arrangement) की मांग की है, जिससे यह साफ हो गया है कि वे अब ममता बनर्जी को अपना संसदीय नेता मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं।

ममता बनर्जी का बढ़ता राजनीतिक संकट

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सियासी राहें लगातार मुश्किल होती जा रही हैं। केवल सांसद ही नहीं, बल्कि पार्टी के 58 से अधिक विधायक पहले ही बगावत का झंडा बुलंद कर चुके हैं। इन बागी विधायकों ने टीएमसी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता मान लिया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब ममता बनर्जी के पास संसद और विधानसभा दोनों ही जगहों पर पर्याप्त संख्या बल नहीं बचा है, जिससे वह नेता विपक्ष का दर्जा हासिल कर सकें। बगावत का यह आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे फिलहाल ममता बनर्जी के इस सियासी संकट का कोई त्वरित समाधान नजर नहीं आ रहा है।