Maharashtra Politics : उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, शिवसेना यूबीटी के छह सांसद बैठक से नदारद रहे

महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ तब आया जब शिवसेना यूबीटी के छह सांसद महत्वपूर्ण बैठक से नदारद रहे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक है या फिर कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आने वाला है, जानिए पूरी कहानी।

Maharashtra Politics

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 18, 2026

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Maharashtra Politics :  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। दिल्ली स्थित शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल के कार्यालय में बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के छह सांसदों की अनुपस्थिति ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी के मुख्य सचेतक अनिल देसाई द्वारा व्हिप जारी कर सभी सांसदों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद, ठाकरे गुट के छह सांसद बैठक से नदारद रहे, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी के भीतर बगावत की आग अब पूरी तरह बाहर आ चुकी है।

ये छह सांसद बैठक से रहे अनुपस्थित

बैठक के दौरान जिस बात का अंदेशा था, वही सच साबित हुआ। संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव जैसे प्रमुख सांसदों का बैठक में शामिल न होना उद्धव ठाकरे के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अरविंद सावंत द्वारा बुलाई गई इस बैठक में महज तीन लोकसभा सांसदों की उपस्थिति ने ठाकरे गुट की राजनीतिक घेराबंदी को उजागर कर दिया है। इसे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के लिए एक बड़ी रणनीतिक कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।

व्हिप का प्रभाव खत्म, शिंदे गुट की ओर बढ़े कदम?

सपा की बैठक के बाद शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने यह कहकर स्थिति को और गंभीर बना दिया कि यूबीटी पार्टी द्वारा जारी व्हिप का अब कोई महत्व नहीं रह गया है। यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि बागी सांसद पार्टी लाइन से हटकर अपना अलग रास्ता चुनने का मन बना चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में पहले से ही इस बात की चर्चा थी कि शिवसेना के कुछ सांसद एक नया गुट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इन चर्चाओं पर विराम लगाने के उद्देश्य से ही दिल्ली में बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बागियों ने अपनी अनुपस्थिति से साफ कर दिया है कि वे ठाकरे नेतृत्व के नियंत्रण से बाहर निकल चुके हैं।

ठाकरे गुट की सख्त चेतावनी: कानूनी कार्रवाई की तैयारी

अपने सांसदों की इस खुली बगावत को उद्धव ठाकरे गुट ने गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में गैरहाजिर रहने वाले सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ठाकरे गुट इन सांसदों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है ताकि दलबदल विरोधी कानून के तहत उन पर दबाव बनाया जा सके। पार्टी का मानना है कि जो सांसद शिंदे गुट की ओर रुख कर रहे हैं, उन्हें इसके संवैधानिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

‘साथ न छोड़ें’: भावनात्मक अपील का नहीं हुआ कोई असर

पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेताओं ने बागियों को समझाने की अंतिम कोशिश भी की। कैलास पाटील ने धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर से संपर्क करने की असफल कोशिश की। पाटील ने भावुक अपील करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में नेताओं को ठाकरे का साथ नहीं छोड़ना चाहिए और ऐसी खबरों पर उन्हें दुख होता है। हालांकि, जमीन पर इन भावनात्मक अपीलों का कोई असर नहीं दिखा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये सांसद औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ेंगे या फिर ठाकरे गुट के सामने नई चुनौतियां पेश करेंगे।

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