Ujjwala Yojna New Rules: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा योजना के नियमों में बड़ा फेरबदल किया गया है। अब उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को एक साल में 9 के बजाय केवल 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर ही उपलब्ध होंगे। सरकार के इस निर्णय का सीधा असर करोड़ों गरीब परिवारों के बजट पर पड़ेगा।
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क्या है नया नियम और सब्सिडी का गणित?
नई व्यवस्था के अनुसार, अब लाभार्थियों को साल भर में केवल 4 रिफिल सिलेंडर पर ही 300 रुपये की सब्सिडी का लाभ मिलेगा। यह राशि सीधे बैंक खाते में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। यदि हम मौजूदा कीमतों की बात करें, तो 7 जून 2026 को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की वृद्धि के बाद दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपये हो गई है। 300 रुपये की सब्सिडी के बाद, उज्ज्वला लाभार्थियों को एक सिलेंडर 642 रुपये में पड़ेगा।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस निर्णय के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, अधिकांश गरीब परिवारों में एक वर्ष के दौरान औसतन 4 सिलेंडरों की ही खपत होती है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता और सप्लाई चेन में बाधाओं को देखते हुए सरकार ने घरेलू सिलेंडर की सुचारू सप्लाई बनाए रखने के उद्देश्य से यह नीतिगत बदलाव किया है।
12 से 4 तक का सफर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों की महिलाओं को धुएं से मुक्त रसोई और स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआत में इस योजना के तहत लाभार्थियों को एक साल में 12 सिलेंडर मिलते थे। समय के साथ बदलते आर्थिक हालातों और सरकार की नीतियों के अनुसार, यह संख्या पहले 12 से घटाकर 9 की गई और अब इसे कम करके 4 निर्धारित कर दिया गया है।
सब्सिडी का वर्तमान स्वरूप
उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी का इतिहास देखें तो सरकार ने मई 2022 में प्रति सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की थी। इसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया, जो वर्तमान में भी लागू है। यह सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है, जिससे उन्हें बाजार दर से 300 रुपये कम कीमत पर ईंधन उपलब्ध हो पाता है।
सरकार के इस कदम को जहां संसाधनों के प्रबंधन के रूप में देखा जा रहा है, वहीं आम लोगों के लिए यह रसोई के बढ़ते खर्च का एक अतिरिक्त बोझ है। लाभार्थियों को अब अपनी गैस खपत को इस नई सीमा के भीतर संतुलित करने की आवश्यकता होगी।
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