UP Assembly: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र का आगाज़ हंगामेदार रहा। राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू हुए इस सत्र में सत्ता पक्ष ने जहाँ अपनी उपलब्धियों का खाका खींचा, वहीं बसपा, सपा और कांग्रेस ने इसे ‘झूठ का पुलिंदा’ बताते हुए सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि सरकार का यह दस्तावेज जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।
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बसपा का रुख
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल का भाषण केवल एक औपचारिक परंपरा बनकर रह गया है, जबकि इसमें प्रदेश के सर्वसमाज के उत्थान के लिए कोई ठोस योजना नहीं दिखी। मायावती के अनुसार, वर्तमान सरकार की गलत कार्यप्रणाली के कारण आम जनता न केवल आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझ रही है, बल्कि प्रदेश में भय का माहौल भी व्याप्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को आज अपने जान-माल और मजहब की सबसे अधिक चिंता है, जिसे सरकार नजरअंदाज कर रही है। यदि राज्यपाल ने इन गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया होता, तो शायद विपक्ष को सदन में नारेबाजी और हंगामे का सहारा नहीं लेना पड़ता।
समाजवादी पार्टी का आरोप
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक शिवपाल सिंह यादव ने अभिभाषण की आलोचना करते हुए इसे ‘झूठी तारीफों का महोत्सव’ कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार गहरे भ्रष्टाचार में लिप्त है और राज्यपाल का संबोधन उसी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता को ढंकने का एक प्रयास है। सपा नेताओं का मानना है कि धरातल पर कोई वास्तविक प्रगति नहीं हुई है और सरकार केवल कागजों पर विकास की तस्वीर पेश कर रही है, जो प्रदेश की जनता के साथ एक बड़ा छलावा है।
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कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने 55 पन्नों के इस अभिभाषण को हवाई वादों का पुलिंदा बताया। उन्होंने तर्क दिया कि राज्यपाल द्वारा पूरा भाषण न पढ़ा जाना ही इस बात का संकेत है कि सरकार के पास दिखाने के लिए कोई वास्तविक उपलब्धि नहीं है। कांग्रेस ने विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों का खूब प्रचार किया गया, लेकिन वहां न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही मरीजों के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस विभाग में लाखों खाली पदों और बढ़ते अपराधों का मुद्दा उठाकर उन्होंने सरकार के सुरक्षा संबंधी दावों की पोल खोली।
विपक्ष का एकजुट प्रदर्शन
सत्र के पहले दिन न केवल सदन के भीतर बल्कि बाहर भी गहमागहमी रही। कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगी दलों ने मिलकर विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने बेरोजगारी, कमरतोड़ महंगाई और किसानों को समय पर खाद-बीज न मिलने जैसी समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने एसआईआर (SIR) नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए मांग की कि सरकार केवल भाषणों तक सीमित न रहकर जनता की वास्तविक तकलीफों का समाधान करे।










