UP Controversy : शासन के सख्त निर्देश और विपक्ष के तीखे सवाल, यूपी की राजनीति में नया उबाल

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक कड़ाई और राजनीतिक बयानबाजी के चलते माहौल गरमा गया है। योगी सरकार द्वारा अधिकारियों को समय सीमा के भीतर काम करने और सुशासन के सख्त निर्देशों के बाद, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर तीखे सवाल दागकर मोर्चा खोल दिया है।

UP Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 22, 2026

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UP Controversy :  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर दिए गए हालिया बयान ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि नमाज केवल मस्जिदों के भीतर ही पढ़ी जानी चाहिए, सड़कों या खुले सार्वजनिक स्थानों पर इसकी अनुमति कतई नहीं दी जाएगी। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि यदि नमाजियों की संख्या अधिक है और नमाज पढ़ना जरूरी है, तो उसे अलग-अलग शिफ्टों में पढ़ा जा सकता है। सरकार किसी को इबादत करने से नहीं रोकेगी, लेकिन इसके चलते आम जनता को असुविधा पहुंचाकर सड़कों को जाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने आगामी त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उलेमाओं का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बकरीद की मुख्य नमाज मस्जिदों और ईदगाहों के परिसरों के भीतर ही शांतिपूर्ण ढंग से अदा की जाएगी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बताया कि त्योहार को लेकर तैयारियां मुकम्मल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान हमेशा से देश के कानून और व्यवस्था का पालन करते आए हैं। नमाज केवल अल्लाह की इबादत नहीं, बल्कि अनुशासन का भी पाठ सिखाती है। सड़कों पर नमाज न पढ़कर मुस्लिम समुदाय ने हमेशा अपनी सभ्यता और कानून के प्रति सम्मान को प्रदर्शित किया है।

शिया उलेमा का रुख

इस पूरे मामले पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि शिया मस्जिदों में ईद की नमाज की तैयारियां सामान्य रूप से चल रही हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शिया संप्रदाय की धार्मिक प्रथाओं के अनुसार सामूहिक नमाज में कई शिफ्ट (जमात) करने का कोई नियम नहीं होता है। मुख्यमंत्री के बयान पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इबादत के मामलों में किसी एक विशेष पद्धति को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार जो भी नियम बनाए, वह सभी समुदायों और धर्मों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। यातायात बाधित करने वाली किसी भी धार्मिक गतिविधि पर रोक का वे समर्थन करते हैं, बशर्ते भेदभाव न हो।

बरेलवी संप्रदाय का समर्थन

बरेलवी संप्रदाय के प्रमुख उलेमाओं ने सड़कों पर नमाज न पढ़ने के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के रुख का खुला समर्थन किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने कहा कि इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार, नमाज के दौरान बंदे और खुदा के बीच कोई बाधा या कोलाहल नहीं होना चाहिए। ऐसी मानसिक शांति और एकाग्रता सड़कों या चौराहों के शोर-शराबे में नहीं, बल्कि मस्जिदों और घरों के शांत माहौल में ही संभव है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लामी कानून के तहत भीड़ अधिक होने की स्थिति में एक ही मस्जिद में अलग-अलग इमामों के नेतृत्व में कई पारियों में नमाज अदा करने की पूरी अनुमति है, और बरेली में इस व्यवस्था को अपनाया जा सकता है।

राजनीतिक मंशा के आरोप

अमरोहा के मदरसा इस्लामिया अरबिया जामा मस्जिद के प्रिंसिपल मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने भी माना कि बिना पूर्व अनुमति के सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर नमाज पढ़ना इस्लामी सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है और आम तौर पर मुस्लिम समाज इसका ध्यान रखता है। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को ‘बेबुनियाद’ करार दिया। मुफ्ती मंसूरपुरी ने आरोप लगाया कि यह बयान पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित है, जिसका मकसद बहुसंख्यक समुदाय का ध्रुवीकरण करना और उन्हें खुश करना है।

अलीगढ़ में एआईएमआईएम की अलग मांग

इन सब के बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की अलीगढ़ इकाई ने एक बिल्कुल अलग रुख अख्तियार कर लिया है। एआईएमआईएम ने स्थानीय जिलाधिकारी (डीएम) को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि ईदगाह परिसर का आकार छोटा होने के कारण मुसलमानों को बाहर की सड़क पर नमाज पढ़ने की विशेष अनुमति दी जाए। पार्टी के जिला अध्यक्ष यामीन खान अब्बासी ने तर्क दिया कि ईद की नमाज की जमात महज आधे घंटे की होती है। चूंकि यह ईदगाह अल्पसंख्यक-बहुल इलाके में स्थित है, इसलिए इससे शहर के मुख्य मार्ग का यातायात प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और सभी धर्मों के लिए एक ही पैमाना होना चाहिए, क्योंकि अक्सर अन्य समुदायों को भी धार्मिक आयोजनों के लिए ऐसी रियायतें मिलती रही हैं।

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