UP Politics : उत्तर प्रदेश में सपा का ब्राह्मण सम्मेलन शुरू, अखिलेश के समर्थन में गूंजा नया नारा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया चुनावी मोड़ देखने को मिल रहा है। समाजवादी पार्टी ने प्रदेशभर में ब्राह्मण सम्मेलन अभियान शुरू कर दिया है, जहां 'ब्राह्मण चला अखिलेश के संग' का नारा गूंज रहा है। आखिर सपा की इस नई रणनीति के पीछे क्या मकसद है, इसका आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है और विपक्ष की प्रतिक्रिया क्या है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 7, 2026

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UP Politics : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अभी छह महीने का समय बाकी है, लेकिन राज्य में राजनीतिक तापमान अभी से ही चरम पर है। सभी प्रमुख दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने और सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से बुनने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी ने कानपुर में एक महत्वपूर्ण ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा मंच के पीछे लगे उस बैनर की रही, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था—”ब्राह्मण चला अखिलेश के संग।” इस नारे ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सपा की बदलती चुनावी रणनीति की ओर भी इशारा किया है।

‘पीडीए’ के बीच ब्राह्मणों को साधने की नई कोशिश

समाजवादी पार्टी मुख्य रूप से अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लेकर आगे बढ़ रही है, लेकिन कानपुर में ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित करके पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल एक ही वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी उन ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है, जो वर्तमान में भाजपा सरकार से किसी न किसी कारणवश नाराज हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बलिया के सपा सांसद सनातन पाण्डेय ने समाज के लोगों को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ने की पुरजोर अपील की।

सपा शासन में सम्मान और सुरक्षा का दावा

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने प्रदेश में ब्राह्मण समाज के सामने आ रही विभिन्न चुनौतियों, उनके कथित उत्पीड़न और समाज के लोगों पर दर्ज किए गए मुकदमों का प्रमुखता से मुद्दा उठाया। सांसद सनातन पाण्डेय ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह सम्मेलन आगामी 5 अगस्त को लखनऊ में होने वाले समाजवादी विचारक जनेश्वर मिश्र के जन्मोत्सव कार्यक्रम की तैयारियों का हिस्सा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज को न केवल पूरा सम्मान दिया जाएगा, बल्कि उन्हें पूर्ण सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि सपा के पिछले शासनकाल में ब्राह्मणों को हमेशा प्राथमिकता और सम्मान मिला है।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर विपक्ष का आक्रामक रुख

इस दौरान राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और अनियमितताओं का मुद्दा भी चर्चा में रहा। सांसद सनातन पाण्डेय ने इस मामले पर सरकार को निशाने पर लेते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। मंदिर के प्रबंधन और चढ़ावे में हेरफेर जैसे संवेदनशील विषयों को उठाकर सपा यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि वह धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारदर्शिता के मुद्दों पर भी भाजपा को घेरने में सक्षम है।

चुनावी रणनीति का बदलता स्वरूप

कानपुर का यह ब्राह्मण सम्मेलन प्रदेश की बदलती चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, विभिन्न वर्गों को अपने साथ जोड़ने की होड़ तेज होती जा रही है। सपा का यह प्रयास यह दर्शाता है कि 2027 के महासमर में जीत हासिल करने के लिए वे अब किसी भी सामाजिक वर्ग को नजरअंदाज करने के जोखिम के बजाय, सबको साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा की यह ‘ब्राह्मण-पीडीए’ की जुगलबंदी चुनावी परिणामों में कितना असर दिखा पाती है।

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