Varanasi Meat Ban News: धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में वाराणसी नगर निगम ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब शहर के भीतर मीट, मछली और नॉनवेज की दुकानें संचालित नहीं हो सकेंगी। नगर निगम प्रशासन ने इन सभी दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की एक ठोस योजना तैयार कर ली है। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित सदन की बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। यह नई व्यवस्था आगामी शारदीय नवरात्रि से पूर्व पूरे शहर में सख्ती से लागू कर दी जाएगी, जिसके बाद शहर के मुख्य इलाकों में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
धार्मिक भावनाओं के मद्देनजर लिया गया कड़ा कदम
वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी ने इस निर्णय के पीछे की मुख्य वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि काशी बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा की पावन नगरी है। यहां कण-कण में देवी-देवताओं का वास है और हर दिन लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर यहां आते हैं। शहर की पौराणिक गरिमा, धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक चरित्र को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यह कड़ा निर्णय आवश्यक था। महापौर ने आश्वस्त किया है कि जो मीट बाजार अब शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट किए जाएंगे, वे पूरी तरह से ‘वेल प्लान्ड’ और सुव्यवस्थित होंगे। इन बाजारों में व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को निगम द्वारा विधिवत लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
इन बाहरी इलाकों में लगेंगे मीट और मछली के बाजार
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन ने शहर की बाहरी सीमाओं पर कुल पांच स्थानों का चयन किया है, जहां अब मीट और मछली की बिक्री की अनुमति होगी। ये पांच निर्धारित स्थान रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर हैं। अब इन चयनित केंद्रों के अलावा शहर के किसी अन्य हिस्से में नॉनवेज बेचना पूरी तरह वर्जित होगा। निगम का उद्देश्य यह है कि इन व्यवसायियों को एक ऐसा स्थाई स्थान मिल सके जहां वे बिना किसी व्यवधान के अपना काम कर सकें, और साथ ही शहर के मुख्य आवासीय व धार्मिक क्षेत्रों में स्वच्छता व सात्विकता बनी रहे।
पार्षदों की मांग और व्यापारियों का हित
सदन की बैठक में यह मुद्दा पार्षद गुलशन अली द्वारा उठाया गया था। उन्होंने मीट व्यवसायियों की समस्याओं को रखते हुए बताया कि पूर्व में भी इस तरह का प्रस्ताव आया था, लेकिन अमल नहीं हो पाया था। उन्होंने सावन के दौरान दुकानों को जबरन बंद कराने के कारण व्यापारियों को होने वाले आर्थिक नुकसान का जिक्र किया। पार्षद ने कहा कि अगर इन दुकानों को स्थाई तौर पर शहर से बाहर व्यवस्थित जगह दे दी जाए, तो दुकानदारों का रोजगार भी प्रभावित नहीं होगा और धार्मिक आस्था का सम्मान भी बना रहेगा। नगर आयुक्त ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए जल्द ही योजना को धरातल पर उतारने का भरोसा दिलाया है, जिससे आम जनता और व्यापारी दोनों को भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा न हो।










