Putin Praises Pakistan : भारत के बाद पुतिन ने की पाकिस्तान की तारीफ, कहा वह एक बड़ा देश

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की तारीफ करने के ठीक बाद अब अंतरराष्ट्रीय मंच से पाकिस्तान की प्रशंसा में बड़े कसीदे पढ़कर सबको चौंका दिया है। वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को एक 'बड़ा देश' बताने के पीछे पुतिन की क्या कोई बहुत बड़ी कूटनीतिक चाल छिपी है? जानिए।

Putin Praises Pakistan

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 5, 2026

Putin Praises Pakistan :  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करने के साथ-साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान को लेकर भी एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल फोरम में वैश्विक पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान पुतिन ने पाकिस्तान को एक बड़ा और संप्रभु राष्ट्र बताया। उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि इस्लामाबाद किसी अन्य शक्ति के इशारे पर काम करता है। पुतिन ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान दुनिया के कई प्रभावशाली देशों के साथ अपने बहुआयामी और स्वतंत्र संबंध रखता है, इसलिए यह सोचना पूरी तरह गलत है कि वह किसी के ‘रिमोट कंट्रोल’ से संचालित होता है।

चीन-पाकिस्तान गठजोड़ और भारत के रक्षा हितों पर पूछे गए सवाल का जवाब

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने पुतिन से एक बेहद संवेदनशील सवाल पूछा कि चूंकि रूस के संबंध पाकिस्तान और चीन दोनों से काफी मजबूत हैं, तो क्या मॉस्को यह सुनिश्चित करेगा कि इस त्रिकोणीय समीकरण से भारत के रणनीतिक और रक्षा हितों को कोई आंच न आए? इस पर रूसी राष्ट्रपति ने अत्यंत कूटनीतिक जवाब देते हुए कहा, “हम भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने सीमा विवादों और भू-राजनीतिक मुद्दों की पेचीदगियों से बहुत अच्छी तरह वाकिफ हैं। हालांकि, मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि पाकिस्तान पूरी तरह से चीन के नियंत्रण या दबाव में काम कर रहा है। वह एक स्वतंत्र देश है, जिसे अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए चीन के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना पड़ रहा है, और आज के दौर में लगभग हर देश चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंध विकसित कर रहा है।”

भारत और चीन के बहुआयामी संबंध

एशिया के दो बड़े देशों के आपसी रिश्तों पर चर्चा करते हुए पुतिन ने कहा कि क्रय शक्ति समता (PPP) और जीडीपी के मामले में चीन, अमेरिका, भारत और रूस दुनिया की शीर्ष चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच के संबंध बेहद संवेदनशील, ऐतिहासिक और बहुआयामी हैं, इसलिए इन दोनों महाशक्तियों के आंतरिक या द्विपक्षीय मामलों में किसी भी तीसरी बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप करना कतई उचित नहीं है। पुतिन ने भरोसा जताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ही परिपक्व नेता हैं और वे सीमा विवाद सहित आपसी हित के सभी जटिल मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

ब्रिक्स की सफलता और रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय सहयोग का इतिहास

रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि रूस के विभिन्न देशों के साथ संबंध किसी अन्य राष्ट्र के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, “रूस और भारत के बीच की गहरी रणनीतिक साझेदारी से चीन को कोई परेशानी नहीं होती और ठीक इसी तरह चीन के साथ हमारे प्रगाढ़ संबंध भारत को विचलित नहीं करते।” उन्होंने ब्रिक्स (BRICS) का ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि एक समय उन्होंने ही यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया था कि भारत और चीन के शीर्ष नेताओं को एक मंच पर मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ ‘रूस-भारत-चीन’ (RIC) त्रिपक्षीय मंच का उदय हुआ, जिसने बाद में ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से वैश्विक राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया।

उन्नत सैन्य तकनीक और रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस की अद्वितीय साझेदारी

पाकिस्तान और चीन के सैन्य गठजोड़ का भारत पर पड़ने वाले असर को खारिज करते हुए पुतिन ने कहा कि रूस को भारत या चीन दोनों में से किसी के भी साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने में कोई व्यावहारिक समस्या नहीं है। उन्होंने भारत के साथ साझा सैन्य परियोजनाओं पर गर्व जताते हुए कहा, “हम अत्याधुनिक और उन्नत हथियारों के विकास में भारत के सबसे भरोसेमंद साझेदार रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण जमीन और समुद्र से मार करने वाली ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइलें हैं।” इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया कि रूस ने भारत को अपने सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान Su-57 की तकनीक पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था, और भविष्य में भी रूस एयर डिफेंस सिस्टम और विमानों के निरंतर विकास के लिए भारत के साथ सहयोग करने को पूरी तरह तैयार है।

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