West Asia Crisis: केंद्र की सर्वदलीय बैठक में हंगामा, संजय राउत ने सरकार को घेरा, पूछे 5 तीखे सवाल

पश्चिम एशिया में बढ़ते बारूद के ढेर के बीच दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक में भारी गहमागहमी रही। संजय राउत ने सरकार से पूछा कि क्या भारत की 'तटस्थता' हमारे हितों को नुकसान पहुँचा रही है? उन्होंने वहां फंसे लाखों भारतीयों की वापसी पर जो सवाल किए, उसने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 25, 2026

West Asia Crisis:  मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आज, 25 मार्च 2026 को, केंद्र सरकार ने देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध की वर्तमान स्थिति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और इस अंतरराष्ट्रीय संकट पर भारत के कूटनीतिक रुख पर चर्चा करना है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे बैठक की अध्यक्षता

सरकार की ओर से बुलाई गई इस सर्वदलीय बैठक की कमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों में होगी। शाम 5 बजे शुरू होने वाली इस चर्चा में विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विपक्षी नेताओं को युद्ध के मैदान की ताज़ा स्थिति और भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी देंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों का भविष्य दांव पर लगा है।

संजय राउत का तंज: “विपक्ष से मशविरा करें पीएम मोदी”

बैठक से ठीक पहले शिवसेना (UBT) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राउत ने कहा कि हम इस बैठक में स्पष्ट रूप से पूछेंगे कि इस वैश्विक संघर्ष में भारत की वास्तविक भूमिका क्या है? उन्होंने प्रधानमंत्री को सुझाव देते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप से बात करने और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उलझने से बेहतर है कि पीएम मोदी अपने देश के विपक्ष से बात करें। राउत के अनुसार, देश के भीतर मौजूद विपक्षी नेताओं के पास ऐसे बेहतरीन सुझाव हैं जो इस संकट की घड़ी में भारत के काम आ सकते हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और भारत की चुप्पी पर सवाल

संजय राउत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हालिया सक्रियता का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान जैसा देश भी अपनी एक स्पष्ट भूमिका लेकर खड़ा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मध्यस्थता की पेशकश कर रहा है। ट्रंप द्वारा इस पेशकश का स्वागत करना भारत के लिए एक कूटनीतिक संकेत है। राउत ने सवाल उठाया कि जब पड़ोसी देश इस मामले में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो भारत का रुख इतना अस्पष्ट क्यों है?

युद्ध का 26वां दिन: ईरान और इजरायल के बीच भीषण तबाही

मिडिल ईस्ट में छिड़ी इस जंग को आज 26 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। संघर्ष के इस चरण में ईरान ने इजरायल और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की अपनी 80वीं खेप दागी है। मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के कारण क्षेत्र में भीषण तबाही का मंजर है। जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली वायुसेना ने भी ईरान के कई शहरों और परमाणु प्रतिष्ठानों के पास एयरस्ट्राइक की है। दोनों पक्षों की ओर से हो रही इस गोलाबारी ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

निष्कर्ष: भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक चुनौती

आज की यह सर्वदलीय बैठक भारत की भविष्य की रणनीति तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। एक तरफ जहां भारत को इजरायल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बचाना है, वहीं दूसरी ओर ईरान और खाड़ी देशों के साथ अपने आर्थिक और ऊर्जा हितों की रक्षा भी करनी है। विपक्ष के कड़े रुख और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लिए सभी को संतुष्ट करना एक बड़ी चुनौती होगी।

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