मुसलमान क्यों नहीं मनाए जन्मदिन

मुसलमान क्यों नहीं मनाए जन्मदिन

मुसलमान क्यों नहीं मनाए जन्मदिन

सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर में देवबंद के उलेमा मुफ्ती असद कासमी ने मुसलमानों के जन्मदिन मनाने को वाजिब करार नहीं दिया है। उलेमा के मुताबिक माने तो कुरान, इस्लाम, शरीअत और हदीस में जन्मदिन मनाए जाने का जिक्र नहीं है। उलेमा का मानना है कि जन्मदिन मनाना ईसाई धर्म के लोगों का तौर-तरीका है। जिन्हें आजकल मुसलमान भी अपना रहे हैं, जो की गलत है।

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दुनियाभर में मशहूर है देवबंद

आपको बतादें कि दिल्ली से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर कस्बा देवबंद है। यह उत्तरप्रदेश के जिला सहारनपुर के अंतर्गत आता है। यहां दारूल उलूम की स्थापना 30 मई 1866 को हुई। इसका मकसद मुसलमानों को इस्लामी शिक्षा देना है। इस्लामी शिक्षा के लिए आज यह दुनियाभर में जाना जाता है। यह सिर्फ एक इस्लामी विश्वविद्यालय नहीं, एक विचारधारा है, इसलिए इस विचारधारा से प्रभावित मुसलमानों को 'देवबंदी' भी कहा जाता है। देवबंद में आज छोटे-बड़े करीब 500 मदरसे और लाइब्रेरी हैं। यहां दुनियाभर के छात्र पढ़ने के लिए आते हैं।

देवबंद उलेमा मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि तमाम उम्मत-ए-मुसलमा को चाहिए जो चीज शरीयत के अंदर नहीं है, उसको हरगिज न करें।

जन्मदिन मानने को लेकर उलेमा मुफ्ती असद कासमी ने कहा- 'मुसलमान भाई ईसाइयों के तौर-तरीके न अपनाएं। जन्मदिन मनाना खुराफात है। मैंने इस्लाम, शरीयत, कुरान और हदीस के बारे में पढ़ा है। कहीं पर भी कुरान या हदीस-ए-नबी में जन्मदिन मनाने के बारे में नहीं लिखा है। न ही कहीं पर भी जन्मदिन मनाने का जिक्र हुआ है। ईसाई लोग जन्मदिन मनाते हैं, जिनकी नकल अब मुसलमान कर रहे हैं। मुसलमानों को इससे बचना और परहेज करना चाहिए।'

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अल्लाह के रसूल ने नहीं मनाया जन्मदिन

मुफ्ती कहने लगे की अल्लाह के रसूल हजरत मोहम्मद साहब ने पूरी जिंदगी जन्मदिन नहीं मनाया और न ही कहीं पर इसका जिक्र किया है। ना ही हजराते सहाबा ने कभी जन्मदिन मनाया है, मगर अब के मुसलमानों ने पता नहीं किस हदीस में पढ़ लिया कि जन्मदिन मनाया जाए। पता नही क्यों मुसलमान जन्मदिन मना रहे हैं, कुछ मुसलमानों ने जन्मदिन मनाने जैसी चीजे शरीयत के अंदर नई पैदा कर दी है। जिसकी शरीयत में कोई हैसियत भी नहीं है। सभी मुसलमानों को अपनी शरीयत पर अटल रहना चाहिए।' मुफ्ती असद ने अपील करते हुए कहा- 'तमाम उम्मत-ए-मुसलमा को चाहिए जो चीज शरीयत के अंदर नहीं है, उसको हरगिज न करें। गैरों का तौर-तरीका न अपनाएं। हम रसूल अल्लाह हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम के तौर तरीकों को ही अपनाया करें। कयामत के दिन अल्लाह के रसूल हजरत मोहम्मद के झंडे के नीचे जमा हों और उन्हीं के साथ हमें उठाया जाए।''

ये फोटो देवबंद की है। यह सहारनपुर में है और इस्लामी शिक्षा के लिए दुनियाभर में मशहूर है।

निकाह पर ना बजाये बैण्ड-बाजा

देवबंदी उलेमा मुफ्ती असद कासमी ने बयान देते हुए कहा- देश के मुसलमानों से अपील करता हूं कि मुसलमानों को ऐसी शादियों से बचना चाहिए, जिसमें इस्लाम और शरीयत के खिलाफ काम होता है। 'शादियों के अंदर बैंड बाजा, आतिशबाजी, घुड़चढ़ी और डीजे से बचना चाहिए। निकाह भी मस्जिद के अंदर पढ़वाना चाहिए। निकाह इस्लाम के रीति रिवाजों के हिसाब से ही करना चाहिए। हालि ही में नोएडा के उलेमाओं ने फैसला लिया है कि वह ऐसी शादियों में नहीं जाएगा जहां इस्लाम और शरीयत के खिलाफ काम होता हो। मैं उलेमाओं के फैसले का पूरी तरह से स्वागत करता हूं।' मैं अपील करता हूं कि इस्लाम के हिसाब से निकाह करें और सादगी के साथ करें। शादी इस्लाम के नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए।


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