Women Reservation Bill 2026: संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार महिला आरक्षण को लेकर एक निर्णायक कदम उठाने जा रही है। 16 अप्रैल, गुरुवार को लोकसभा में सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने के लिए तैयार है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) को एक साथ अमलीजामा पहनाना है। हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्षी खेमा बंटा हुआ नजर आ रहा है; जहां कांग्रेस और सपा सरकार को घेर रहे हैं, वहीं मायावती और पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जैसे दिग्गजों ने इसका समर्थन किया है।
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संसद में पेश होने वाले तीन प्रमुख विधेयक

सरकार ने इस विशेष सत्र के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री की ओर से निम्नलिखित तीन विधेयक पेश किए जाएंगे। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: इसके माध्यम से लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
परिसीमन विधेयक, 2026: इसके तहत नए परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान है।
केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: केंद्र शासित प्रदेशों के नियमों में आवश्यक बदलाव हेतु। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, इन विधेयकों पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। सरकार की योजना है कि वर्ष 2029 के चुनावों से महिला आरक्षण को पूरी तरह लागू कर दिया जाए।
कांग्रेस और सपा का कड़ा विरोध
विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने इस बिल के प्रावधानों, विशेषकर परिसीमन को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर ‘ओबीसी का हक चोरी करने’ का आरोप लगाया। उनका तर्क है कि सरकार पुराने 2011 के आंकड़ों का उपयोग करना चाहती है, जबकि आरक्षण नई जाति जनगणना के आधार पर होना चाहिए ताकि ओबीसी वर्ग को सही प्रतिनिधित्व मिल सके।
सपा प्रमुख ने इसे PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में जनगणना को टालकर पिछड़ों का हक मारना चाहती है। कांग्रेस नेता अनंत गाडगिल ने चेतावनी दी कि सीटों के बढ़ने से उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच एक भावनात्मक और राजनीतिक विभाजन पैदा हो सकता है।
मायावती और प्रतिभा पाटिल का मिला समर्थन
विपक्ष के एक धड़े के विरोध के बीच, बसपा प्रमुख मायावती ने इस संशोधन का स्वागत किया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने वाला कदम बताया।
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में उनका हमेशा से मानना रहा है कि वास्तविक सशक्तिकरण तभी होगा जब महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान अवसर मिलेंगे। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने भी इस कदम को महिलाओं के लंबे संघर्ष का एक ‘सुखद अंत’ बताया है।
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