Zomato Fee Hike: जोमैटो ने फिर दिया महंगाई का झटका, प्लेटफॉर्म फीस में भारी बढ़ोतरी, क्या स्विगी भी बढ़ाएगी दाम?

ऑनलाइन फूड डिलीवरी दिग्गज जोमैटो (Zomato) ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में ₹2.40 की बढ़ोतरी की है, जिससे नई दर ₹14.90 प्रति ऑर्डर हो गई है। सितंबर 2025 के बाद यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। रैपिडो की नई सेवा 'ओनली' और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच जोमैटो के इस फैसले से ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ना तय है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 20, 2026

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Zomato Fee Hike: ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दिग्गज कंपनी जोमैटो (Zomato) ने अपने ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ाते हुए प्लेटफॉर्म फीस में एक बार फिर इजाफा कर दिया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब मार्केट में नए खिलाड़ियों की एंट्री से प्रतिस्पर्धा और ईंधन की कीमतों का दबाव बढ़ रहा है।

प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म शुल्क में ₹2.40 की वृद्धि

बताते चले कि, जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में सीधे 2.40 रुपये की बढ़ोतरी की है। इस बदलाव के बाद अब ग्राहकों को प्रति ऑर्डर 12.50 रुपये के बजाय 14.90 रुपये (GST अतिरिक्त) का भुगतान करना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि सितंबर 2025 के बाद यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। जोमैटो के इस कदम का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के कुल बिल पर पड़ेगा, जो पहले से ही विभिन्न शुल्कों से परेशान हैं।

स्विगी बनाम जोमैटो

आमतौर पर देखा गया है कि फूड डिलीवरी मार्केट के ये दोनों बड़े खिलाड़ी अपनी फीस संरचना को एक जैसा रखते हैं। वर्तमान में स्विगी टैक्स सहित लगभग 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर वसूल रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जोमैटो के इस फैसले के बाद जल्द ही स्विगी भी अपनी फीस में बढ़ोतरी कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो बाहर से खाना मंगवाना मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए और भी महंगा सौदा साबित होगा।

बाजार में रैपिडो की एंट्री

जोमैटो ने यह फैसला तब लिया है जब बेंगलुरु में रैपिडो (Rapido) ने अपनी नई फूड डिलीवरी सर्विस ‘ओनली’ (ONLY) लॉन्च की है। रैपिडो का दावा है कि वह ग्राहकों या रेस्टोरेंट से कोई अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस नहीं लेगा। नए खिलाड़ियों द्वारा ‘जीरो प्लेटफॉर्म फीस’ के मॉडल को अपनाने से जोमैटो और स्विगी जैसे स्थापित ब्रांड्स पर दबाव बढ़ना तय है। ग्राहकों द्वारा लगातार बढ़ते बिल को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच यह नया कॉम्पिटिशन मार्केट का रुख बदल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतें और संचालन लागत का असर

इस मूल्य वृद्धि के पीछे एक बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी हैं। ईंधन महंगा होने से डिलीवरी ऑपरेशन्स की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ता है। डिलीवरी पार्टनर्स और रेस्टोरेंट्स को बैलेंस करने के लिए कंपनियां अक्सर ग्राहकों पर इस लागत का बोझ डालती हैं। इसी वजह से प्रति ऑर्डर कुल बिल की राशि लगातार बढ़ती जा रही है।

शेयर बाजार का हाल

दिलचस्प बात यह है कि प्लेटफॉर्म फीस बढ़ने की खबर के साथ ही शेयर बाजार में सकारात्मक हलचल देखी गई। इटरनल (Eternal) के शेयरों में 2.80 रुपये यानी 1.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह 231.70 रुपये पर ट्रेड करने लगा। हालांकि, यह शेयर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर (368.40 रुपये) से अब भी करीब 37 प्रतिशत नीचे है, लेकिन कंपनी का मार्केट कैप 223,598.62 करोड़ रुपये पर मजबूत बना हुआ है।

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