रक्षा सौदे में नया मोड़: भारत के रुख से फ्रांस को लग सकता है झटका, मित्र देश ने दिया नया ऑफर

नई दिल्ली भारत फाइटर जेट स्क्वाड्रन की घटती संख्या को मेंटेन करने के लिए फ्रांस के साथ 114 राफेल जेट की डील पर बातचीत कर रहा है. यह करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील है. इसको लेकर इंडियन एयर फोर्स चीफ एपी सिंह एक दिन पहले तक फ्रांस में थे. लेकिन, अभी तक इस डील का सबसे बड़ा पेच नहीं सुलझा है. भारत चाहता है कि फ्रांस इस जेट का सोर्स कोड नहीं तो कम से कम इंटरफेस डॉक्यूमेंट साझा करे जिससे कि भारत इस जेट में देसी ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलें लगा सके. लेकिन, फ्रांस इंटरफेस डॉक्यूमेंट भी

Wrriten By :

Editor

Published On :

जून 6, 2026

नई दिल्ली

भारत फाइटर जेट स्क्वाड्रन की घटती संख्या को मेंटेन करने के लिए फ्रांस के साथ 114 राफेल जेट की डील पर बातचीत कर रहा है. यह करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील है. इसको लेकर इंडियन एयर फोर्स चीफ एपी सिंह एक दिन पहले तक फ्रांस में थे. लेकिन, अभी तक इस डील का सबसे बड़ा पेच नहीं सुलझा है. भारत चाहता है कि फ्रांस इस जेट का सोर्स कोड नहीं तो कम से कम इंटरफेस डॉक्यूमेंट साझा करे जिससे कि भारत इस जेट में देसी ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलें लगा सके. लेकिन, फ्रांस इंटरफेस डॉक्यूमेंट भी नहीं देना चाहता है. उसकी चिंता है कि अगर वह भारत के साथ यह डॉक्यूमेंट साझा करेगा तो उसकी पूरी गोपनीयता भारत के हाथ लग जाएगी. फिर ये गोपनीय जानकारी भारत के जरिए उसके दुश्मन देश यानी रूस तक पहुंच जाएगी. इसी कारण वह फिलहाल राफेल का इंटरफेस डॉक्यूमेंट नहीं देना चाहता है। 

भारत के लिए सुखद ऑफर
इस बीच भारत के लिए एक सुखद खबर आई है. राफेल को लेकर बनी भ्रम की स्थिति के बीच पुराने दोस्त रूस ने बड़ा ऑफर दिया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद एक बड़ी पेशकश कर दी है. उन्होंने इंटरनेशनल प्रेस मीट में कहा कि रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 से लेकर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम तक हर स्तर पर भारत का सहयोग करने के लिए तैयार है. पुतिन का स्पष्ट रूप से यह कहना दुनिया खासकर फ्रांस के लिए एक बड़ा संदेश है. भारत रूस से एसयू-57 खरीदने की भी योजना पर काम कर रहा है. ऐसे में भारत कितनी संख्या में यह जेट खरीदेगा यह काफी हद तक राफेल डील पर निर्भर करेगा। 

दरअसल, एसयू-57 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. अभी तक दुनिया में केवल तीन देश ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें एक अमेरिका, दूसरा चीन और तीसरा देश रूस है. हालांकि रूसी पांचवीं पीढ़ी के जेट एसयू-57 को लेकर एक्सपर्ट कई सवाल भी उठाते रहे हैं लेकिन, रूस की ओर से पूरा सोर्स कोड़ साझा करने, भारत में इस जेट को बनाने और भारत की जरूरत के हिसाब से इस जेट में बदलाव करने जैसे ऑफर को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है. सामरिक मामलों के एक्सपर्ट यहां तक कह रहे हैं कि भारत की योजना राफेल के साथ-साथ सुखोई-57 के कम से कम तीन स्क्वाड्रन लेने की है. इससे भारत पांचवीं पीढ़ी की अपनी तात्कालिक जरूरत को पूरा कर लेगा. इसके बाद 2035 तक भारत का अपना 5+ पीढ़ी का जेट एम्का तैयार हो जाएगा. भारत एम्का प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। 

फ्रांस को संदेश
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ऑफर भारत के नजरिए से काफी अहम है. पुतिन इंटरनेशनल प्रेस के सामने यह बात कही है. ऐसे में पुतिन का यह बयान काफी कुछ कहता है. इसमें यह संदेश छिपा है कि अगर फ्रांस भारत के साथ इंटरफेर डॉक्यूमेंट नहीं साझा करता है तो भारत के विकल्प खुले हैं. भारत पहले ही से रूस का एक बड़ा सैन्य पार्टनर रहा है. इस वक्त भी भारतीय एयरफोर्स की रीढ़ सुखोई-30 एमके जेट हैं. ये चौथी पीढ़ी के जेट हैं और भारत के पास इसके 250 से अधिक यूनिट हैं. इनको भारत में ही असेंबल किया गया है. रूस ने सुखोई-30एमकेई के प्लांट में ही सुखोई-57 को असेंबल करने का ऑफर दिया है. इससे भारत के लिए खर्च में काफी कमी आ जाएगी. इसके साथ ही रूसी विमानों में किसी भी भारतीय मिसाइल को जोड़ना आसान रहेगा. ऐसे में पुतिन का संदेश केवल भारत के लिए नहीं है बल्कि फ्रांस के लिए भी है।