Bashir Badr Passes Away: नहीं रहे मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र, 91 की उम्र में ली अंतिम सांस, सीएम मोहन यादव ने जताया शोक

प्रसिद्ध शायर और पद्म श्री से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। भोपाल में अंतिम सांस लेने वाले इस दिग्गज कवि के निधन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया है। वे अपनी गजलों और शायरी में जीवन दर्शन के लिए दुनिया भर में मशहूर थे। पढ़ें उनका संपूर्ण सफर।

Bashir Badr Passes Away

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 28, 2026

Bashir Badr Passes Away: मशहूर शायर और पद्म श्री से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का गुरुवार, 28 मई को भोपाल में 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से देश के साहित्य प्रेमियों और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सीएम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ”डॉ. बशीर बद्र ने अपनी रचनाओं के जरिए जीवन को संवेदनशीलता, अपनत्व और मानवता के साथ जीने का अनमोल संदेश दिया। अपनी शायरी से जिंदगी को बेहद आसान बनाने के सूत्र देने वाले इस दिग्गज शायर को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।”

भोपाल स्थित आवास पर ली अंतिम सांस

‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए’ जैसी कालजयी पंक्तियों के रचयिता बशीर बद्र लंबे समय से बीमार चल रहे थे। गुरुवार की दोपहर उन्होंने भोपाल स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु से उर्दू अदब के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। उनके प्रशंसकों और चाहने वालों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। उनका जाना साहित्य की दुनिया के लिए एक बड़ा शून्य छोड़ गया है, जिसे उनकी गजलों और शेरों के माध्यम से हमेशा महसूस किया जाएगा।

अयोध्या से शुरू हुआ साहित्यिक सफर

बताते चले कि, डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उनका असली नाम सय्यद मुहम्मद बशीर था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में उर्दू के शिक्षक के तौर पर अपनी सेवाएं दीं और भाषा पर अपनी गहरी पकड़ के लिए विख्यात रहे। वे न केवल उर्दू, बल्कि फारसी, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं के भी जानकार थे। उनकी 69 गजलों का संग्रह ‘आस’ बेहद चर्चित रहा, जबकि ‘कुल्लियते बशीर बद्र’ जैसे संग्रहों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान कायम की।

गजलों में ताजगी और सौंदर्य का अनूठा मेल

डॉ. बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी गजलों में मिलने वाली संवेदना, ताजगी और काव्यात्मक सौंदर्य थी, जो उन्हें अन्य शायरों से विशिष्ट बनाती थी। उन्होंने महज सात साल की उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। जानकारों के अनुसार, वे उर्दू की कोमलता को अन्य भाषाओं के उच्चारण में पिरोने में माहिर थे। उन्होंने उर्दू में सात से अधिक और हिंदी में एक कविता संग्रह प्रकाशित कर साहित्य को समृद्ध किया। उनकी शायरी का सौंदर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा।