Debasish Samantray Joins BJP: अनिल बलूनी के एक पोस्ट से मचा था हड़कंप, अब खुला राज! नवीन पटनायक के सबसे करीबी नेता ने थामा भाजपा का दामन

भाजपा में नई सियासी हस्ती के आगमन से ओडिशा और बंगाल की राजनीति में हलचल है। भाजपा प्रवक्ता और सांसद अनिल बलूनी के बयान के बाद ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने बीजद छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

Debasish Samantray Joins BJP

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 26, 2026

Debasish Samantray Joins BJP: ओडिशा की राजनीति में आज एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। बीजू जनता दल (BJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। दिल्ली स्थित भाजपा राष्ट्रीय मुख्यालय में उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। नवीन पटनायक के बेहद करीबी माने जाने वाले सामंतराय के इस कदम से बीजद को बड़ा झटका लगा है, वहीं बीजद ने उन पर स्वार्थ के कारण पार्टी छोड़ने का पलटवार किया है। इस जॉइनिंग को लेकर सुबह से ही दिल्ली से लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में भारी हलचल और कयासबाजी का दौर जारी था।

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अनिल बलूनी के एक पोस्ट ने बढ़ाई थी राजनीतिक धड़कनें

इस बड़े सियासी घटनाक्रम की पटकथा सुबह ही लिखी जा चुकी थी, जब भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तराखंड से नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक सस्पेंस भरा पोस्ट किया। उन्होंने एलान किया कि सुबह 11:00 बजे भाजपा मुख्यालय में देश की एक ‘प्रख्यात हस्ती’ पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाली है।

बलूनी के इस पोस्ट में नाम का खुलासा न होने के कारण सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया। लोग अंदाजा लगाने लगे कि आखिर वह कौन सा बड़ा चेहरा है जो भाजपा में शामिल होने जा रहा है।

बंगाल से ओडिशा तक अटकलें

अनिल बलूनी के इस एलान के बाद दो राज्यों के बड़े नेताओं के नामों को लेकर कयास लगाए जाने लगे। कयासों के केंद्र में सबसे ऊपर बीजद के बागी नेता देबाशीष सामंतराय का नाम चल रहा था, जिन्होंने एक दिन पहले ही पार्टी से नाता तोड़ा था। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी बड़ी खबर की सुगबुगाहट थी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वालीं काकोली घोष दस्तीदार को लेकर भी अटकलें तेज थीं कि वे भी भाजपा का रुख कर सकती हैं। इन चर्चाओं ने बंगाल से लेकर ओडिशा तक की राजनीति में हलचल मचा दी थी।

राज्यसभा और बीजद से इस्तीफे ने पहले ही दे दिए थे संकेत

देबाशीष सामंतराय का भाजपा में जाना अचानक लिया गया फैसला नहीं था। इसकी भूमिका सोमवार को ही तय हो गई थी जब उन्होंने बीजद की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ अपने राज्यसभा पद से भी इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफे के बाद सामंतराय ने बीजद नेतृत्व पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए। दो बार विधायक रह चुके सामंतराय ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक के बेहद करीबी होने के बावजूद, पिछले कुछ समय से पार्टी में उन्हें लगातार नीचा दिखाया जा रहा था और उनकी घोर अनदेखी की जा रही थी। स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि उन्हें अपने ही पार्टी प्रमुख से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही थी।

‘बीजू बाबू की विरासत’ पर उठाए गंभीर सवाल

सामंतराय का पार्टी नेतृत्व से मोहभंग काफी समय से चल रहा था। इससे पहले नवंबर 2025 में भी उन्होंने बीजद के वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बीजू जनता दल अब ओडिशा के महान नेता पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक की मूल विचारधारा से पूरी तरह भटक चुका है। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि बीजू बाबू की ऐतिहासिक विरासत को आज ऐसे बाहरी लोगों के हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है, जिनका उस विचारधारा या ओडिशा के संघर्ष से कोई सीधा संबंध ही नहीं है। आज की इस सियासी एंट्री के बाद ओडिशा में भाजपा और मजबूत स्थिति में नजर आ रही है।

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