Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, CLU प्रक्रिया हुई आसान, घटे दस्तावेजों के झंझट

हरियाणा में लालफीताशाही और भ्रष्टाचार पर सरकार का अब तक का सबसे बड़ा ताला! निवेशकों, उद्योगपतियों और आम जनता को बड़ी राहत देते हुए हरियाणा सरकार ने चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) प्रक्रिया को पानी की तरह आसान बना दिया है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 5, 2026

Haryana News: हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने प्रदेश में व्यापार, उद्योग और निवेश को एक तूफानी रफ्तार देने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक प्रशासनिक सुधार कर दिया है। निवेशकों, उद्योगपतियों और आम नागरिकों को लालफीताशाही (Red Tapism) और दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाते हुए सरकार ने ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (CLU – भूमि उपयोग परिवर्तन) की बेहद जटिल प्रक्रिया को पानी की तरह आसान बना दिया है।

नए नियमों के तहत, अब हरियाणा में सीएलयू (CLU) की अनुमति के लिए पहले की तरह 19 भारी-भरकम दस्तावेज और फाइलें जमा करने की कोई जरूरत नहीं होगी। अब जनता और निवेशक केवल 3 मुख्य दस्तावेजों के आधार पर ही सीधा आवेदन कर सकेंगे। सरकार के इस कड़क फैसले से न सिर्फ फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि निवेशकों का समय और पैसा दोनों बचेगा, जिससे सूबे में नए रोजगार के दरवाजे खुलेंगे।

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मुख्य सचिव का सख्त एक्शन

हरियाणा सरकार इस बार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए पूरी तरह आक्रामक मूड में दिखाई दे रही है। खुद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक ने संबंधित विभागों के आला अधिकारियों के साथ हाई-लेवल बैठक की है।

अब हरियाणा के कौन-कौन से इलाकों को इस मास्टरस्ट्रोक योजना का सबसे बड़ा फायदा मिलने जा रहा है, वो हम आपको आगे बताएंगे… लेकिन उससे पहले यह जान लीजिए कि अफसरों को क्या कड़े निर्देश मिले हैं? मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को साफ लहजे में हिदायत दी है कि रेगुलेटरी रिफॉर्म्स (नियामक सुधारों) को तय समय सीमा के भीतर और पूरी आक्रामकता के साथ लागू किया जाए, ताकि किसी भी फाइल को बेवजह न अटकाया जा सके।

इस ऐतिहासिक फैसले का सबसे बड़ा धमाका यह है कि अब हरियाणा के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में सीएलयू (CLU) परमिशन लेने की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इस क्रांतिकारी कदम से हरियाणा के ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-Urban) इलाकों में छोटे-बड़े उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों में एक बड़ा बूम आने की उम्मीद जताई जा रही है।

ऑटो-CLU और सेल्फ-सर्टिफिकेशन का महा-ब्लॉस्ट

हरियाणा सरकार ने प्रदेश के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME Sector) को प्रोत्साहित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को अब पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत और हाईटेक बना दिया है। भूमि उपयोग के कड़े और पुराने नियमों में बड़ा लचीलापन लाते हुए सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ‘ऑटो-सीएलयू’ (Auto-CLU) व्यवस्था को हरी झंडी दे दी है। यानी अब तय औद्योगिक जोन में उद्योगों को परमिशन के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि सिस्टम के जरिए ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी।

यही नहीं, अब कम जोखिम वाली सामान्य और छोटी इमारतों के लिए ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) हासिल करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि यह सर्टिफिकेट स्व-प्रमाणीकरण (Self-Certification) के आधार पर तुरंत जारी कर दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल उच्च जोखिम (High-Risk) वाली विशेष श्रेणी की इमारतों और बड़े प्रोजेक्ट्स में ही ‘थर्ड पार्टी सत्यापन’ (Third Party Verification) की सख्त व्यवस्था लागू रहेगी, ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी कड़क परफॉर्मेंस

सरकार के इस बड़े रिफॉर्म को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने भी उद्योगपतियों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने उद्योगों को शुरू करने के लिए मिलने वाले सबसे जरूरी क्लीयरेंस— ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ (CTE) और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (CTO) की समय-सीमा को पूरी तरह घटा दिया है।

पहले इन दोनों मंजूरियों को पाने के लिए कंपनियों को कम से कम 30 कार्य दिवस (Working Days) का लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब बोर्ड इसे मात्र 21 कार्य दिवस के भीतर क्लियर करके देगा। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का साफ मानना है कि सीएलयू प्रक्रिया के इस महा-सरलीकरण से न सिर्फ घरेलू बल्कि विदेशी निवेशक भी हरियाणा की तरफ खिंचे चले आएंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नया बूस्टर डोज मिलेगा।

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