Haryana News: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एक बेहद भावुक और कड़क संदेश देते हुए संपूर्ण मानव जाति को धरती के कायाकल्प के लिए आगे आने को कहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पेड़-पौधे इस धरती का असली श्रृंगार हैं और विकास की अंधी दौड़ में हमने इस श्रृंगार को पूरी तरह उजाड़ दिया है। अनिल विज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक अभियान “एक पेड़ मां के नाम” का पुरजोर समर्थन करते हुए देश-प्रदेश की जनता से अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने और उसका संरक्षण करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हम अब भी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ी को एक बीमार और प्रदूषित धरती सौंपकर जाएंगे।
अम्बाला छावनी में गरजे अनिल विज
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर अम्बाला छावनी के राजकीय पीजी कॉलेज में एक भव्य और राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहां ऊर्जा मंत्री अनिल विज मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
गब्बर के नाम से मशहूर अनिल विज ने मंच से नदियों और पेड़ों को लेकर क्या कड़वा सच देश के सामने रखा, वो हम आपको आगे बताएंगे… लेकिन उससे पहले यह जान लीजिए कि उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत कैसे की? अनिल विज ने सबसे पहले कॉलेज के प्रांगण में अपने हाथों से एक औषधीय पौधा रोपा और उपस्थित हजारों छात्रों व नागरिकों को पर्यावरण बचाने का संकल्प दिलाया। जनता को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पर्यावरण किसी एक शहर, जिले या देश की बपौती नहीं है, बल्कि यह पूरी मानव जाति के अस्तित्व से जुड़ा है। इंसान को जिंदा रहने के लिए जल, वायु, भूमि, अग्नि और आकाश जैसे पांच तत्वों की जरूरत होती है। लेकिन आज हमने शुद्ध हवा, पीने का पानी और उपजाऊ मिट्टी सब कुछ दूषित कर दिया है।
विकास की अंधी दौड़ ने नदियों को बनाया कचराघर
अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज़ में अनिल विज ने कहा कि भारत की संस्कृति में नदियों को माता और पेड़ों को देवता का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज का इंसान अपनी ही माताओं और देवताओं का कत्ल कर रहा है।
उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि हम नदियों में कचरा और फैक्ट्रियों का जहर डालकर उन्हें मार रहे हैं, वहीं बेवजह जंगलों को काटकर धरती को कंक्रीट का जंगल बना रहे हैं। प्लास्टिक को पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए विज ने कहा कि यह कभी गलता नहीं है, नाले-नालियों को जाम करता है और इसके दूषित असर से आज इंसानों में फेफड़े का कैंसर और अन्य जानलेवा बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं। उन्होंने जनता से आज ही सिंगल-यूज प्लास्टिक को पूरी तरह त्यागने का संकल्प लेने को कहा।
हम अनाज नहीं, जहर खा रहे हैं!
कृषि और खान-पान में बढ़ते जहर पर चिंता जताते हुए ऊर्जा मंत्री ने देश के किसानों और उपभोक्ताओं को एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज बाजारों में जो अनाज और सब्जियां मिल रही हैं, वे रासायनिक खादों (Chemical Fertilizers) से लथपथ हैं।
अनिल विज ने कहा, “हम आज खुराक नहीं खा रहे, मात्र अपने पेट को भरने के लिए कचरा खा रहे हैं।” यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी में आलस्य, सुस्ती और कम उम्र में ही गंभीर बीमारियां घर कर रही हैं। हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वक्त की मांग है कि हम सभी बिना रसायनों वाली ऑर्गेनिक सब्जियों और प्राकृतिक अनाज की तरफ लौटें, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। प्रकृति के गुस्से की याद दिलाते हुए उन्होंने कोविड काल का उदाहरण दिया और कहा कि जब इंसान घरों में बंद था, तो नदियां और हवा खुद-ब-खुद साफ हो गई थीं। प्रकृति के साथ खिलवाड़ बंद करना ही होगा।
वट वृक्ष बना अम्बाला का राजकीय कॉलेज
कार्यक्रम के अंत में अनिल विज भावुक हो गए और उन्होंने राजकीय पीजी कॉलेज के निर्माण के अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने गर्व से कहा कि जिस कॉलेज को बनवाने के लिए उन्होंने सालों तक कड़ा संघर्ष किया था, आज वह एक विशाल ‘वट वृक्ष’ बनकर देश का नाम रोशन कर रहा है।
आज इस कॉलेज में लगभग 5,000 छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और यहां 20 से अधिक आधुनिक शैक्षणिक कोर्स चलाए जा रहे हैं। कॉलेज का परीक्षा परिणाम (Result) हमेशा अव्वल रहता है, जिससे अम्बाला छावनी ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों के बच्चों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है।










