Jagannath Temple Puri : ओडिशा के तटीय शहर पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का ऐतिहासिक मंदिर करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की अटूट आस्था का एक महान केंद्र है। महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हर साल देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। मंदिर में दान-पुण्य करने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन अब तकनीक के इस आधुनिक दौर में भक्तों को दान देने के लिए विशेष रूप से पुरी जाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। ओडिशा सरकार की एक नई और अनूठी पहल के माध्यम से जल्द ही दुनिया भर के श्रद्धालु अपने घर बैठे-बैठे ही डिजिटल माध्यम से सीधे मंदिर में अपनी श्रद्धानुसार गुप्तदान या समर्पण राशि भेज सकेंगे।
‘समर्पण ऐप’ और ‘ई-हुंडी’ सेवा से आएगी दान प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ओडिशा सरकार ने पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में अत्याधुनिक ‘ई-हुंडी’ सेवा शुरू करने का एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत ‘समर्पण ऐप’ को लॉन्च किया जा रहा है, जिसके माध्यम से देश और विदेश में रहने वाले महाप्रभु के भक्त बेहद आसानी से और चंद क्लिक्स में ऑनलाइन डोनेशन दे सकेंगे। सरकार का दावा है कि ऑनलाइन लेनदेन की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित और अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों से लैस होगी, जिससे दाताओं के मन में किसी भी प्रकार की शंका नहीं रहेगी।
कानून मंत्री का बड़ा बयान
इस महत्वाकांक्षी डिजिटल योजना के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य पूरी दान प्रक्रिया को श्रद्धालुओं के लिए अधिक पारदर्शी, सुलभ, आधुनिक और सुरक्षित बनाना है। उन्होंने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इसी चालू महीने के भीतर भक्तों के लिए ‘समर्पण ऐप’ की सेवाओं को पूरी तरह से लाइव कर दिया जाएगा। इस सेवा के शुरू होने के बाद बुजुर्ग, बीमार और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले भक्त भी मंदिर की व्यवस्थाओं में अपना योगदान दे पाएंगे।
प्राप्त दान राशि का सदुपयोग
आधिकारिक सूत्रों और विभागीय दिशानिर्देशों से मिली जानकारी के अनुसार, डिजिटल रूप से ‘ई-हुंडी’ के माध्यम से प्राप्त होने वाली संपूर्ण धनराशि सीधे श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के आधिकारिक और प्रमाणित बैंक खाते में जमा की जाएगी। इस एकत्रित राशि का मुख्य रूप से इस्तेमाल भव्य मंदिर परिसर के समग्र विकास, सौंदर्यीकरण, बुनियादी ढांचे के सुधार और प्राचीन मंदिर के वैज्ञानिक रख-रखाव कार्यों में किया जाएगा। इसके अलावा, इस फंड का एक बड़ा हिस्सा पुरी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के रहने, भोजन, चिकित्सा और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं को बेहतर बनाने में भी खर्च होगा।
ऑनलाइन दानकर्ताओं को मिलेगा टैक्स बेनिफिट
राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि ‘ई-हुंडी’ के माध्यम से दान करने वाले सभी दाताओं को आयकर कानून के तहत टैक्स बेनिफिट (आयकर में छूट) का लाभ भी प्रदान किया जाएगा। चूंकि यह पूरा मामला पूरी तरह से ऑनलाइन और डिजिटल लेन-देन से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। डिजिटल ठगी, साइबर फ्रॉड या किसी भी प्रकार के वित्तीय दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बेहद मजबूत और चौबीसों घंटे काम करने वाला विशेष निगरानी तंत्र (मॉनिटरिंग सिस्टम) भी तैयार किया जाएगा।
‘यूनिफॉर्म सेटलमेंट पॉलिसी’
‘ई-हुंडी’ और डिजिटल डोनेशन सेवा की शुरुआत के साथ-साथ ओडिशा सरकार एक और युगांतकारी कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही एक ‘समान निपटान नीति’ (Uniform Settlement Policy) लाने की व्यापक तैयारी में है। यह दूरगामी नीति भगवान जगन्नाथ के नाम दर्ज संपत्तियों, कीमती जमीनों और उनसे जुड़े दशकों पुराने विवादों का स्थायी एवं कानूनी समाधान निकालेगी। कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नई नीति के आधिकारिक मसौदे (ड्राफ्ट) पर आगामी कैबिनेट बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी और कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा।
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