Karnataka politics: कर्नाटक की नई सरकार में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आया जब वरिष्ठ नेता और मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विभागों के बंटवारे से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें बेंगलुरु विकास मंत्रालय देने का वादा किया था, लेकिन शपथ ग्रहण के बाद उन्हें सिंचाई मंत्रालय सौंपा गया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सएप पर भेज दिया।
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मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेड्डी उनके सबसे करीबी दोस्तों में से एक हैं और सभी समस्याएं सुलझा ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक कहानियां न बनाई जाएं क्योंकि अब सब कुछ ठीक है। शुक्रवार रात को दोनों नेताओं के बीच दो घंटे लंबी बैठक हुई, जिसे उभरते राजनीतिक संकट को शांत करने का प्रयास माना गया।
अन्य मंत्रियों की नाराजगी
रेड्डी के इस्तीफे के बाद सरकार के भीतर असंतोष और बढ़ गया। वरिष्ठ मंत्री केएच मुनियप्पा ने भी अपने मंत्रालय को लेकर असंतोष जताया। उन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग दिया गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि कैबिनेट का सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के नाते उन्हें एक महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलना चाहिए। उन्होंने अपनी अपेक्षाओं के बारे में पार्टी नेतृत्व और राहुल गांधी तक को अवगत कराया।
वहीं, मंत्री सतीश जारकीहोली ने लोक निर्माण विभाग बरकरार रखा है, लेकिन उन्होंने केपीसीसी अध्यक्ष पद की भी मांग की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे।
महिला प्रतिनिधित्व पर आलोचना
नई सरकार को आलोचना का सामना तब करना पड़ा जब कैबिनेट में किसी भी महिला मंत्री को शामिल नहीं किया गया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मार्गरेट अल्वा ने सोशल मीडिया पर निराशा जताई और कहा कि यह निर्णय महिलाओं के लिए निराशाजनक है। इस पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने जवाब दिया कि कैबिनेट में अभी कई पद खाली हैं और विस्तार के दौरान महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
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