Kumbh Viral Girl Monalisa: प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान मनकों की माला बेचते हुए वायरल हुई मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फरमान खान का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े कानूनी और विवादित मोड़ पर पहुँच गया है। अंतरधार्मिक विवाह, उम्र संबंधी विवाद और अपहरण के आरोपों से घिरे इस कपल की अग्रिम जमानत याचिका पर केरल हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है। मंगलवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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केरल हाई कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस कौसर एडप्पागथ की टिप्पणी ने सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने कपल से कहा कि वे खुद को भाग्यशाली समझें कि वे इस समय केरल में हैं। इस पर कपल के वकील ने भावुक होकर जवाब दिया, “यही कारण है कि आज हम जीवित हैं।” कोर्ट की यह टिप्पणी मध्य प्रदेश में मिल रही धमकियों और वहां के चुनौतीपूर्ण माहौल की ओर इशारा करती है। कोर्ट ने मामले पर अपना आदेश बुधवार को सुनाने का संकेत दिया है।
उम्र और विवाह की वैधता का पेच
विवाद का मुख्य केंद्र मोनालिसा की उम्र और उनके विवाह की वैधता है। वरिष्ठ अधिवक्ता एम. ससींद्रन ने कपल की ओर से दलील दी कि मध्य प्रदेश के कट्टरपंथी समूह और प्रशासन के कुछ अधिकारी मोनालिसा को जबरन नाबालिग साबित कर उनकी शादी को अवैध घोषित करने की साजिश रच रहे हैं। उनका दावा है कि शादी के समय मोनालिसा बालिग थीं और बाद में सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की गई है।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कोर्ट में तर्क दिया कि मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि दिसंबर 2009 है, जिसके अनुसार विवाह के समय वह नाबालिग थीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब दूल्हा मुस्लिम है, तो विवाह हिंदू रीति-रिवाजों से कैसे संपन्न हुआ। सरकार ने फरमान खान पर अपहरण और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
केरल बनाम मध्य प्रदेश
यह मामला केवल दो राज्यों के बीच नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक और सामाजिक विवाद में भी बदल गया है। तिरुवनंतपुरम की एक पॉक्सो कोर्ट में भी इस मामले को लेकर निजी शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें फरमान खान के अलावा वामपंथी नेताओं (एम.वी. गोविंदन, वी. शिवनकुट्टी और ए.ए. रहीम) पर भी शादी में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।
अदालत का रुख और भविष्य
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के कुछ तर्कों पर सवाल भी उठाए। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि स्वयं मोनालिसा ने अपने पति के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, जो इस मामले के अन्य दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने देश में अंतरधार्मिक विवाह और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें केरल हाई कोर्ट के उस आदेश पर टिकी हैं, जो इस चर्चित कपल के भविष्य और उनकी कानूनी स्थिति का निर्धारण करेगा।
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