Manoj Jarange : नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और पेपर लीक जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। छात्रों का यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है और विभिन्न सामाजिक संगठनों व जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिलने लगा है।
छात्र आंदोलन को मिला मनोज जरांगे पाटिल का समर्थन
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए। जरांगे का यह फैसला आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक समर्थन देने वाला माना जा रहा है। उनके जुड़ने से प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मनोबल बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली पहुंचकर छात्रों से करेंगे सीधी मुलाकात
जानकारी के अनुसार, मनोज जरांगे पाटिल बुधवार सुबह अपने गांव अंतरवाली सराटी (जिला जालना) से छत्रपति संभाजीनगर के लिए रवाना हुए। वहां से वे विमान के जरिए दिल्ली पहुंचेंगे और सुबह करीब 11 बजे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे छात्रों की मांगों को सुनेंगे और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करेंगे। उन्होंने कहा कि वे छात्रों के संघर्ष में पूरी निष्ठा और मजबूती के साथ उनके साथ खड़े रहेंगे।
लाठीचार्ज की घटना पर जताई नाराजगी
हाल ही में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर मनोज जरांगे पाटिल ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर दिया जोर
मनोज जरांगे ने कहा कि यदि देश के युवाओं को अपनी समस्याएं रखने का अवसर नहीं मिलेगा तो लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार पर बढ़ सकता है समाधान का दबाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनोज जरांगे पाटिल के समर्थन से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को नई ऊर्जा मिल सकती है। इससे छात्रों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलने की संभावना है। आने वाले दिनों में सरकार पर इस पूरे मामले में जल्द निर्णय लेने और विवाद का समाधान निकालने का दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली इस मुलाकात और उसके बाद आंदोलन की आगामी रणनीति पर टिकी हुई हैं।








