Modi Mantrimandal Vistar : दो केंद्रीय मंत्रियों को दोबारा राज्यसभा न भेजने के भाजपा के निर्णय के बाद मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष आगामी 9 जून को पूरे होने जा रहे हैं। यदि उनके पुराने कार्यकालों के रिकॉर्ड को देखा जाए, तो इस बात की पूरी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में केंद्रीय कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। माना जा रहा है कि अगले साल देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी यह बड़ा कदम उठा सकते हैं।
आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों पर टिकीं सबकी निगाहें
अगले वर्ष पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने तय हैं। इनमें से सिर्फ पंजाब और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में फिलहाल भाजपा की सरकारें हैं। पंजाब से आने वाले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा राज्यसभा का टिकट न मिलना यह संकेत देता है कि राज्य से किसी नए चेहरे को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। वहीं, पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय महासचिव तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है।
यूपी के कई बड़े मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल हो रहा समाप्त
इसके साथ ही कुछ अन्य केंद्रीय मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल भी इसी साल समाप्त होने जा रहा है। वर्तमान केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं, जिनका कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश से ही राज्यसभा सांसद और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के राज्य मंत्री बी एल वर्मा का कार्यकाल भी इस साल 25 नवंबर को पूरा होने जा रहा है।
चुनावी राज्यों के नेताओं को मंत्रिमंडल विस्तार में मिलेगा बड़ा फायदा
उत्तर प्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों पर इस साल के अंत में मतदान होना है, जिसके तुरंत बाद अगले साल की शुरुआत में राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। इसी समय उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में भी चुनाव होंगे, जबकि साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मतदान होगा। चुनावी गणित को देखते हुए इन राज्यों के नेताओं को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है। कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, तो कुछ के विभागों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में कैबिनेट सचिव द्वारा पेश किए गए मंत्रालयों के परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड और जन शिकायतों के निपटारे को इस फेरबदल का मुख्य आधार माना जा रहा है।
परफॉर्मेंस के आधार पर होगी कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी
पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनने के कारण इस बार मंत्रिपरिषद में वहां का प्रतिनिधित्व बढ़ने की पूरी उम्मीद है। इसके विपरीत, बिहार के कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि उत्तर प्रदेश से भी नए नाम शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, सहयोगी दलों का कोटा मौजूदा स्तर पर ही रहेगा और सत्तर वर्ष से अधिक आयु के मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है। वर्तमान में 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद को अधिकतम 81 तक बढ़ाया जा सकता है, जिसमें क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष जोर रहेगा।
पुराने रिकॉर्ड्स और प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट बदलने की रणनीति
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के गठन को 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं और तीसरे कार्यकाल के दो साल 9 जून को पूरे हो रहे हैं। इतिहास देखें तो पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में छह महीने बाद नवंबर 2014 में पहला विस्तार किया था, जिसके बाद जुलाई 2016 और सितंबर 2017 में बदलाव किए गए। दूसरे कार्यकाल में सरकार बनने के दो साल बाद जुलाई 2021 में बड़ा विस्तार हुआ और मई 2023 में विभागों को बदला गया था। इसी ढर्रे पर चलते हुए अब तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होते ही बड़े फेरबदल की चर्चाएं सच साबित होने की ओर हैं।









