New Labour Code: नए लेबर कोड में बड़ा बदलाव, जानें 4-डे वर्कवीक से PF तक क्या बदला

भारत में काम करने के तरीके और सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड लागू किए हैं।

New Labour Code

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 14, 2026

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New Labour Code: भारत में काम करने के नियमों और वेतन संरचना में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त करके 4 नए लेबर कोड लागू किए हैं। इन नए नियमों का असर सीधे कर्मचारियों की सैलरी, काम के घंटे, पीएफ और रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर पड़ेगा। इन बदलावों के बाद वर्किंग स्टाइल और वर्क-लाइफ बैलेंस पूरी तरह बदलने की संभावना है। आइए जानते हैं इन नए नियमों के 11 प्रमुख बदलाव, जो कर्मचारियों की जिंदगी को प्रभावित करेंगे।

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काम के घंटे और 4-डे वर्कवीक में बड़ा बदलाव

नए लेबर कोड के तहत कंपनियों को अब 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का विकल्प मिलेगा। हालांकि इसके लिए कर्मचारियों को प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे तक काम करना पड़ सकता है, ताकि हफ्ते में कुल 48 घंटे का नियम पूरा किया जा सके।

सैलरी स्ट्रक्चर में नया नियम

नए नियमों के अनुसार कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए। इसका मतलब है कि भत्तों का हिस्सा 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकेगा। इस बदलाव से सैलरी स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगा और पीएफ की गणना भी नए तरीके से होगी।

इन-हैंड सैलरी और पीएफ पर असर

बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ कटौती भी बढ़ जाएगी, जिससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। हालांकि, लंबे समय में यह बदलाव कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड और बचत के लिए फायदेमंद साबित होगा।

ग्रेच्युटी, ओवरटाइम और फाइनल सेटलमेंट में सुधार

नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी नियमों में भी राहत दी गई है। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को अब सिर्फ 1 साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा, जो पहले 5 साल था। इसके अलावा, ओवरटाइम करने पर कर्मचारियों को दोगुना वेतन देना अनिवार्य होगा। नौकरी छोड़ने या निकाले जाने पर कंपनियों को 2 कार्य दिवसों के भीतर पूरा सेटलमेंट करना होगा।

सैलरी भुगतान और महिला कर्मचारियों के लिए नए नियम

सैलरी भुगतान को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। कर्मचारियों को हर महीने की सैलरी अगले महीने की 7 तारीख तक देना अनिवार्य होगा। दिहाड़ी मजदूरों को उसी दिन भुगतान करना होगा। महिला कर्मचारियों को अब सभी सेक्टर में नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए कंपनियों को सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

कंपनियों के लिए नए अनिवार्य नियम

20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में शिकायत निवारण समिति बनाना अनिवार्य होगा, जिसमें महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी होगी। शिकायतों का निपटारा 30 दिनों के भीतर करना होगा। 100 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों में कैंटीन और एम्बुलेंस सुविधा अनिवार्य होगी, साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच भी कंपनी की जिम्मेदारी होगी।

छंटनी और बंदी पर सख्त नियम

300 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को छंटनी या बंदी के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी। छंटनी की स्थिति में कर्मचारियों को वेतन, महंगाई भत्ता और अतिरिक्त मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है।

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