Mamata Banerjee Lok Sabha : ममता बनर्जी की लोकसभा जाने की राह मुश्किल, यूसुफ पठान ने सीट छोड़ने से किया इनकार

पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान ने अपनी लोकसभा सदस्यता छोड़ने की अटकलों पर पूरी तरह से विराम लगाते हुए एक ऐसा चौंकाने वाला फैसला लिया है, जिसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संसद जाने के बड़े प्लान को बड़ा झटका दे दिया है। जानिए इस गुप्त सियासी खींचतान का पूरा सच।

Mamata Banerjee Lok Sabha

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 5, 2026

Mamata Banerjee Lok Sabha : पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी अब दिल्ली की राजनीति में कदम रखने यानी लोकसभा चुनाव लड़ने की गंभीर तैयारी कर रही हैं। राजनीतिक गलियारों से मिल रही खबरों के अनुसार, ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के बहरामपुर लोकसभा सीट से सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को पद से इस्तीफा देने के लिए कहा है। ममता का मुख्य उद्देश्य इस सीट पर होने वाले संभावित उपचुनाव में जीत हासिल कर देश की संसद (लोकसभा) पहुंचना है।

यूसुफ पठान ने ममता बनर्जी का प्रस्ताव ठुकराया

ममता बनर्जी चाहती हैं कि यूसुफ पठान अपनी बहरामपुर लोकसभा सीट खाली कर दें ताकि वह वहां से चुनाव मैदान में उतर सकें। हालांकि, सूत्रों के हवाले से आई खबर ने सबको हैरान कर दिया है; यूसुफ पठान ने ममता बनर्जी के लिए अपनी जीती हुई सीट छोड़ने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस बीच ममता बनर्जी के पुराने और करीबी सहयोगी हुमायूं कबीर उनके समर्थन में आगे आए हैं और उन्होंने ममता को एक बड़ा राजनीतिक ऑफर दिया है।

हुमायूं कबीर ने ममता को दिया अपनी सीट का ऑफर

विधायक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी के संकट को भांपते हुए उन्हें रेजीनगर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी इससे पहले भवानीपुर सीट पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के सामने विधानसभा चुनाव हार गई थीं। हुमायूं कबीर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह खुद राज्य की राजनीति (स्टेट पॉलिटिक्स) में सक्रिय रहना चाहते हैं, इसलिए वे ममता बनर्जी के लिए अपनी एक सीट खाली करने को पूरी तरह तैयार हैं। बता दें कि हुमायूं कबीर ने दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर ही ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जिसमें से एक रेजीनगर सीट भी शामिल है।

करारी हार के बाद टीएमसी में बड़ी बगावत का डर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी और अप्रत्याशित हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर आंतरिक बगावत का दौर शुरू हो गया है। पार्टी के करीब 60 विधायकों ने खुलेआम विद्रोह कर दिया है और उन्होंने ममता बनर्जी के निर्देशों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए सदन में अपना नया विपक्ष का नेता भी चुन लिया है। इतना ही नहीं, अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 20 सांसद भी किसी भी वक्त बगावत का झंडा बुलंद कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के इसी बिखराव को रोकने और अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए ममता बनर्जी जल्द से जल्द लोकसभा जाना चाहती हैं। लेकिन यूसुफ पठान के इनकार ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

क्या कहता है चुनावी नियम और कैसी हैं चुनौतियां?

संवैधानिक नियमों के अनुसार, ममता बनर्जी को संसद सदस्य (सांसद) बनने के लिए सबसे पहले किसी भी मौजूदा सांसद की सीट खाली करानी होगी। सीट खाली होने के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा छह महीने के भीतर वहां उपचुनाव कराया जाएगा, जिसे जीतकर ही ममता लोकसभा पहुंच सकती हैं। हालांकि, बहरामपुर या किसी अन्य सीट से जीत हासिल करना ममता के लिए कांटों भरा ताज साबित होने वाला है। वह अपने पिछले तीन चुनावों में से दो बड़े चुनाव हार चुकी हैं और दोनों ही बार उन्हें भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने शिकस्त दी है।

राजनीतिक रूप से कमजोर हुईं ममता बनर्जी

साल 2026 में बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद राजनीतिक रूप से ममता बनर्जी काफी कमजोर स्थिति में नजर आ रही हैं। बहरामपुर सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी आज भी उन्हें कड़ी टक्कर देकर हराने का माद्दा रखते हैं। वहीं, राज्य की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी भाजपा भी इस उपचुनाव में कोई बेहद दमदार और लोकप्रिय उम्मीदवार उतारकर ममता बनर्जी को एक बार फिर चुनावी शिकस्त देने की पूरी कोशिश करेगी। इन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए ममता बनर्जी के लिए लोकसभा जाने की राह बेहद पथरीली और मुश्किल नजर आ रही है।

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